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बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: महाराष्ट्र में सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर रोक!
मुंबई 16 अक्टूबर 2026
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जताते हुए सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत के निर्देशों के अनुसार, महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर प्रतिबंध लागू रहेगा। यह निर्देश नवरात्रि, दीपावली, क्रिसमस और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान भी प्रभावी रहेगा।
शहरों के गैस चैंबर बनने की जताई आशंका
जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोकले की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान शहरों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक नागरिक परिस्थितियों की गंभीरता और शहरों में रहने के दीर्घकालिक खतरों को नहीं समझेंगे, तब तक हालात बिगड़ते रहेंगे। प्रदूषण की यही स्थिति जारी रही तो शहर गैस चैंबर में तब्दील हो सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि समस्या नए कानूनों की कमी नहीं, बल्कि मौजूदा नियमों और कानूनों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं होना है। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और संविधान के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।
गणेशोत्सव के दौरान दिए गए निर्देशों का बढ़ा दायरा
यह आदेश 22 सितंबर को गणेशोत्सव के दौरान दिए गए निर्देशों के दायरे को आगे बढ़ाने के क्रम में आया है। अदालत ने त्योहारों के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने से होने वाले शोर और वायु प्रदूषण पर चिंता जताई। विशेष रूप से दीपावली के बाद वातावरण में बढ़ने वाले प्रदूषण का बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई।
हालांकि, अदालत के आदेश में पटाखों के निर्माण और उनकी व्यावसायिक बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई है। मुख्य जोर सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने से रोकने और प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन कराने पर है।
महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन को सख्त निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए और प्रदूषण रोकने के लिए निर्धारित नियमों को गंभीरता से लागू किया जाए।
अदालत के इस रुख को त्योहारों के दौरान बढ़ते प्रदूषण और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली असुविधा को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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