नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज करने में देरी करने पर सीडब्ल्यूसी ने थानाध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण…….

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नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज करने में देरी का आरोप, सीडब्ल्यूसी ने थानाध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण

बस्ती 23 अक्टूबर 2026

जनपद बस्ती में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज करने में देरी और कथित रूप से सुलह का दबाव बनाने के आरोप पर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने सख्त रुख अपनाया है। समिति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थानाध्यक्ष और विवेचक से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्हें 27 अक्टूबर 2026 तक जवाब देने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर प्रकरण उच्चाधिकारियों को भेजने और विधिक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है।

हर्रैया थाना क्षेत्र का मामला

बाल कल्याण समिति को दी गई शिकायत के अनुसार, हर्रैया थाना क्षेत्र के बेनीपुर (ककरहिया) निवासी पीड़िता की मां ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ हुई घटना को लेकर शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 3 अक्टूबर 2026 की शाम करीब सात बजे मिश्रौलियाधीश निवासी प्रदीप कुमार पुत्र परसुराम उनके घर पहुंचा।

आरोप है कि प्रदीप कुमार ने शादी का झांसा देकर नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म किया और उसे अपने घर ले जाकर रातभर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की मां का आरोप है कि घटना के संबंध में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने के बजाय संबंधित दरोगा ने सुलह-समझौते का दबाव बनाया। इन आरोपों को लेकर बाल कल्याण समिति से शिकायत की गई।

बाल कल्याण समिति ने जताई नाराजगी

समिति ने अपने पत्र में कहा है कि लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत पीड़िता के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समिति ने मुकदमा दर्ज करने में कथित देरी और सुलह कराने के प्रयासों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विवेचक से जवाब मांगा है।

समिति ने यह भी सवाल उठाया है कि शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों हुई और कथित तौर पर सुलह कराने का प्रयास किस आधार पर किया गया। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, बस्ती को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

27 अक्टूबर तक जवाब देने का निर्देश

सीडब्ल्यूसी ने संबंधित थानाध्यक्ष/विवेचक को 27 अक्टूबर 2026 तक अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष भेजने और विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

यह मामला नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी से जुड़ा है। फिलहाल संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष और मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट होगी।

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