साली नें सपने में छेड़खानी का लगाया आरोप-एयरफोर्स जवान के 7 साल हो गये बर्बाद…….

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सपने में लगाए गए आरोप से एयरफोर्स जवान के 7 साल बर्बाद, कोर्ट ने किया बरी

कानपुर, 11 मार्च.
एक सपने में लगे छेड़खानी के आरोप ने एयरफोर्स के एक जवान की जिंदगी के सात साल तक उलझाकर रख दी। जेल की सजा, अदालतों के चक्कर, करियर में रुकावट और सामाजिक अपमान झेलने के बाद आखिरकार अदालत ने उसे निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।

मामला कानपुर के बिठूर क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार यहां रहने वाले एयरफोर्स कर्मी अनुराग की शादी 10 फरवरी 2019 को बिधनू क्षेत्र की एक युवती से हुई थी। शादी के बाद पत्नी अपने ससुराल आई और उसके साथ उसकी 15 वर्षीय छोटी बहन भी रहने के लिए आ गई। कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन 8 मार्च 2019 की रात अचानक एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे परिवार और आरोपी जवान की जिंदगी को बदलकर रख दिया।

बताया जाता है कि उस रात घर में सो रही किशोरी अचानक चीखते हुए उठी और उसने आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसके साथ छेड़खानी की है। किशोरी की आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य भी जाग गए। किशोरी ने अपने जीजा पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद उसके पिता ने अपने दामाद के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी।

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एयरफोर्स कर्मी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भी भेजा गया, जहां वह करीब 19 दिन तक बंद रहा। इसके बाद अदालत से जमानत मिलने पर वह बाहर आया, लेकिन मामला अदालत में चलता रहा और उसके जीवन पर इसका गहरा असर पड़ा।

करीब दो साल बाद 2021 में जब इस मामले की सुनवाई के दौरान किशोरी का बयान अदालत में दर्ज किया गया, तब पूरे मामले की सच्चाई सामने आई। किशोरी ने अदालत को बताया कि घटना वाले दिन उसने दवा ली थी और वह गहरी नींद में थी। उसी दौरान उसे ऐसा महसूस हुआ कि उसके जीजा ने उसे पकड़ लिया है। बाद में उसे एहसास हुआ कि यह सब वास्तव में नहीं हुआ था, बल्कि उसने यह दृश्य सपने में देखा था।

किशोरी के इस बयान के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। अदालत ने पूरे साक्ष्यों और बयानों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोपी एयरफोर्स जवान के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

हालांकि अदालत से बरी होने के बाद भी एयरफोर्स जवान अनुराग का कहना है कि इस घटना ने उसके जीवन के सात महत्वपूर्ण वर्ष छीन लिए। उसने बताया कि झूठे आरोपों के कारण उसे जेल जाना पड़ा, लंबे समय तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़े और इस दौरान उसे प्रमोशन भी नहीं मिल सका। इसके अलावा समाज में भी उसे काफी अपमान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।

अनुराग ने कहा कि उसके ससुर ने जल्दबाजी में उसके खिलाफ मामला दर्ज करा दिया था, जिसके कारण उसे वर्षों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं उसके वकील का भी कहना है कि मामले की शुरुआत से ही आरोपों में दम नहीं था और जांच के दौरान भी कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया।

यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि गंभीर आरोपों के मामलों में तथ्यों की गहराई से जांच और सतर्कता बेहद जरूरी होती है, क्योंकि एक आरोप किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी और करियर को प्रभावित कर सकता है।

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