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तीन युद्ध लड़ने वाले 92 वर्षीय रिटायर्ड कैप्टन अब अपनी ही जमीन बचाने की लड़ाई में, 25 बीघा भूमि फर्जीवाड़े का आरोप
जैसलमेर, 12 जुलाई 2026।
देश की रक्षा के लिए 1962 के भारत-चीन युद्ध तथा 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बहादुरी से मोर्चा संभाल चुके 92 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी कैप्टन चुन्नी लाल ठाकुर अब अपनी ही जमीन बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित अपनी 25 बीघा कृषि भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निवासी कैप्टन चुन्नी लाल ठाकुर पोंग डैम विस्थापित परिवार से हैं। पोंग डैम परियोजना के निर्माण के दौरान उनकी पैतृक जमीन अधिग्रहित कर ली गई थी। इसके बदले सरकार ने पुनर्वास योजना के तहत जैसलमेर के मोहंगढ़ क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत 25 बीघा सिंचित कृषि भूमि आवंटित की थी। वर्षों से इस जमीन पर स्थानीय किसानों के माध्यम से खेती कराई जा रही थी और उन्हें उपज का हिस्सा मिलता था।
बताया गया कि हाल ही में खेत की देखभाल करने वाले किसान ने उन्हें सूचना दी कि उनकी जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो चुकी है। यह सुनकर कैप्टन ठाकुर और उनका परिवार हैरान रह गया।
आरोप है कि 16 जून को उनकी अनुपस्थिति में जाली दस्तावेजों के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई और 26 जून को राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन भी करा लिया गया। परिवार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया बिना वास्तविक मालिक की मौजूदगी, बिना फिंगरप्रिंट और बिना फोटो सत्यापन के पूरी कर दी गई। Ui
घटना की जानकारी मिलने पर कैप्टन ठाकुर हिमाचल प्रदेश से जैसलमेर पहुंचे और राजस्व विभाग तथा पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। हालांकि शुरुआती स्तर पर मामला दर्ज नहीं किया गया। बाद में जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे के हस्तक्षेप के बाद सिटी कोतवाली थाने में धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
कैप्टन ठाकुर के बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब जमीन मालिक स्वयं मौजूद नहीं था, तब आखिर किस आधार पर रजिस्ट्रेशन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर पूरी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।
वहीं, सैनिक विश्राम गृह के प्रभारी और रिटायर्ड एयरफोर्स सार्जेंट लाला राम का कहना है कि भूमि माफिया विशेष रूप से पोंग डैम विस्थापित परिवारों और दूसरे राज्यों में रहने वाले रिटायर्ड सैनिकों की जमीनों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वे लंबे समय तक अपनी संपत्ति की निगरानी नहीं कर पाते।
उधर, जैसलमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेवंतदान ने पुष्टि की है कि मामले में धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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