Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

हर बारिश में क्यों टूट जाती हैं सड़कें और पुल? आखिर जिम्मेदार कौन—सरकार, अधिकारी या ठेकेदार?
16 जुलाई 2026।
📍उद्घाटन के दो-तीन महीने के अंदर टूट रही सड़के……. जिम्मेदार कौन
मानसून शुरू होते ही देश के अलग-अलग राज्यों से नई बनी सड़कों के उखड़ने, पुलों में दरार आने या ढहने और सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगते हैं। ऐसे में आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें कुछ ही महीनों में क्यों टूट जाती हैं? क्या इसके लिए सरकार जिम्मेदार है, अधिकारी जिम्मेदार हैं या फिर ठेकेदार?
विशेषज्ञों और सरकारी ऑडिट रिपोर्टों के अनुसार इसका कोई एक कारण नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर होने वाली चूक का परिणाम होता है।
1. घटिया निर्माण सामग्री और गुणवत्ता में समझौता
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की कई ऑडिट रिपोर्टों में पाया गया है कि कई परियोजनाओं में निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। कहीं मानक के अनुरूप बिटुमेन नहीं लगाया गया तो कहीं कमजोर गुणवत्ता का कंक्रीट इस्तेमाल हुआ। ऐसे निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगते हैं।
2. निगरानी और निरीक्षण में लापरवाही
किसी भी सड़क या पुल का निर्माण केवल ठेकेदार नहीं करता, उसकी गुणवत्ता की निगरानी इंजीनियरों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होती है। कई मामलों में समय पर निरीक्षण नहीं होता या गुणवत्ता परीक्षण औपचारिकता बनकर रह जाता है। इससे निर्माण में खामियां समय रहते पकड़ में नहीं आतीं।
3. खराब ड्रेनेज सिस्टम
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क टूटने का सबसे बड़ा कारण केवल बारिश नहीं, बल्कि पानी की निकासी की खराब व्यवस्था है। यदि सड़क के किनारे पानी जमा होता है तो उसकी नींव कमजोर होने लगती है और कुछ ही दिनों में गड्ढे बन जाते हैं। हाल की कई रिपोर्टों में भी ड्रेनेज की कमी को प्रमुख वजह बताया गया है।
4. डिजाइन और तकनीकी खामियां
कुछ मामलों में समस्या निर्माण से पहले ही शुरू हो जाती है। यदि सड़क या पुल का डिजाइन स्थानीय मिट्टी, जलभराव या ट्रैफिक भार को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया हो तो मजबूत सामग्री के बावजूद संरचना जल्दी खराब हो सकती है। संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने भी कई हाईवे परियोजनाओं में डिजाइन संबंधी कमियों की ओर ध्यान दिलाया है।
5. क्षमता से अधिक भार
देश की सड़कों पर कई बार ओवरलोड ट्रकों का संचालन होता है। तय सीमा से अधिक वजन सड़क और पुलों की आयु को तेजी से कम करता है। नियमित ओवरलोडिंग से नई सड़कें भी जल्दी खराब होने लगती हैं।
6. जवाबदेही की कमी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी सड़क या पुल में निर्माण के कुछ महीनों बाद ही खराबी आ जाती है तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। लेकिन कई मामलों में जांच लंबी चलती है और दोष तय होने या कार्रवाई होने में देरी होती है। इसी कारण लापरवाही दोहराई जाती है।
क्या केवल ठेकेदार दोषी है?
इस सवाल का सीधा जवाब नहीं है। किसी भी सरकारी परियोजना में कई स्तर शामिल होते हैं—
- सरकार बजट और नीति तय करती है।
- विभाग और अधिकारी डिजाइन, स्वीकृति और निगरानी करते हैं।
- ठेकेदार निर्माण करता है।
- इंजीनियर गुणवत्ता प्रमाणित करते हैं।
यदि इनमें से किसी भी स्तर पर लापरवाही होती है तो उसका असर सड़क या पुल की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसलिए किसी एक पक्ष को हर मामले में दोषी ठहराना उचित नहीं होगा; जिम्मेदारी मामले-दर-मामले तय होती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
बुनियादी ढांचे के विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री, स्वतंत्र गुणवत्ता जांच, पारदर्शी ठेका प्रक्रिया, समय-समय पर रखरखाव, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर समयबद्ध कार्रवाई से ऐसी घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।
निष्कर्ष:
हर बारिश में सड़कें टूटना या पुलों का क्षतिग्रस्त होना केवल “बारिश” का परिणाम नहीं माना जा सकता। निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी योजना, निगरानी, रखरखाव, जल निकासी और जवाबदेही—इन सभी की भूमिका होती है। जहां ये व्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां सड़कें और पुल वर्षों तक टिकाऊ रहते हैं; जहां इनमें कमी रहती है, वहां मानसून उन कमजोरियों को जल्दी उजागर कर देता है।
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