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मुरादाबाद | 29 अगस्त 2026
रोजी-रोटी का सहारा बनी साइकिल गई तो टूट गया था मजदूर, थाना प्रभारी ने अपने स्तर से नई साइकिल देकर लौटाई उम्मीद
मुरादाबाद। पुलिस की पहचान आमतौर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधियों पर कार्रवाई करने और लोगों की शिकायतों का निस्तारण करने वाली व्यवस्था के रूप में होती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से सामने आई एक घटना ने खाकी के मानवीय चेहरे की तस्वीर भी सामने रखी है। यहां एक मजदूर की साइकिल गुम हो जाने के बाद सिविल लाइंस थाना प्रभारी हरीशवर्धन ने अपने स्तर से उसे नई साइकिल भेंट की। नई साइकिल पाकर मजदूर अर्जुन भावुक हो गया और उसकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
जानकारी के मुताबिक, मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की हरथला स्थित कांशीराम कॉलोनी निवासी अर्जुन दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि रोजाना की मजदूरी ही परिवार की जरूरतों को पूरा करने का मुख्य जरिया है। काम पर आने-जाने के लिए उसके पास साइकिल थी और यही साइकिल उसकी रोजी-रोटी से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई थी।
जिला अस्पताल से गुम हो गई थी साइकिल
बताया गया कि अर्जुन की साइकिल जिला अस्पताल से गुम हो गई थी। साइकिल की तलाश में उसने काफी प्रयास किए, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। साइकिल चले जाने से अर्जुन के सामने सिर्फ एक वाहन के चोरी होने की समस्या नहीं थी, बल्कि मजदूरी के काम तक पहुंचने और परिवार का खर्च चलाने की परेशानी खड़ी हो गई थी।
अर्जुन ने मामले की शिकायत भी की। इसी बीच जब उसकी परेशानी की जानकारी सिविल लाइंस थाना प्रभारी हरीशवर्धन को हुई तो उन्होंने मामले को केवल एक साइकिल के गुम होने की घटना के तौर पर नहीं देखा, बल्कि मजदूर की रोजी-रोटी से जुड़ी समस्या को समझा।
थाना प्रभारी ने खुद बुलाया और दी नई साइकिल
रिपोर्टों के अनुसार, थाना प्रभारी हरीशवर्धन ने अर्जुन से संपर्क किया और उसे थाने बुलाया। अर्जुन जब थाना प्रभारी से मिलने पहुंचा तो उसे उम्मीद नहीं थी कि वहां उसके लिए कुछ ऐसा इंतजार कर रहा होगा, जो उसकी परेशानी काफी हद तक खत्म कर देगा।
थाना प्रभारी हरीशवर्धन ने अर्जुन को अपने स्तर से एक नई साइकिल भेंट की। इतना ही नहीं, साइकिल का बिल भी अर्जुन को सौंपा गया।
नई साइकिल पाकर भर आईं आंखें
नई साइकिल सामने देखकर अर्जुन भावुक हो गया। उसके लिए यह सिर्फ एक साइकिल नहीं थी, बल्कि दोबारा काम पर जाने और मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण करने का साधन थी। साइकिल मिलने के बाद उसके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी और उसने थाना प्रभारी हरीशवर्धन का आभार जताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अर्जुन ने साइकिल मिलने को अपने लिए फिर से आत्मनिर्भर होकर मेहनत करने की नई उम्मीद बताया।
छोटी मदद, लेकिन मजदूर के लिए बड़ा सहारा
थाना प्रभारी की इस पहल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिहाड़ी मजदूर के लिए साइकिल जैसी सामान्य दिखाई देने वाली वस्तु भी उसकी पूरी आजीविका का आधार हो सकती है। अर्जुन के मामले में साइकिल का गुम होना उसके काम पर जाने की क्षमता और परिवार की आय, दोनों को प्रभावित कर रहा था।
ऐसे में थाना प्रभारी द्वारा अपने स्तर से नई साइकिल उपलब्ध कराना उस मजदूर के लिए तत्काल राहत का जरिया बना। पुलिस की इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है और इसे खाकी के संवेदनशील तथा मानवीय पक्ष के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
खाकी की जिम्मेदारी के साथ इंसानियत का संदेश
पुलिस की भूमिका केवल अपराध रोकने और कानून लागू कराने तक सीमित नहीं है। समाज में पुलिस और आम लोगों के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत करने में मानवीय व्यवहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुरादाबाद की यह घटना इसी पहलू को सामने लाती है।
अर्जुन की साइकिल चोरी होने के बाद उसका वापस मिलना संभव नहीं हुआ, लेकिन थाना प्रभारी हरीशवर्धन की पहल ने उसके सामने खड़ी रोजी-रोटी की मुश्किल को जरूर कम कर दिया। एक जरूरतमंद मजदूर को साइकिल देकर उसे फिर से मेहनत के रास्ते पर लौटने में मदद करना इस बात का संदेश देता है कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील इंसान मौजूद है।
अर्जुन के लिए नई साइकिल महज आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि उसके परिवार की आजीविका से जुड़ी उम्मीद है। मुरादाबाद पुलिस से जुड़ी यह तस्वीर इसी वजह से चर्चा में है और लोग थाना प्रभारी हरीशवर्धन की इस मानवीय पहल की सराहना कर रहे हैं।
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👉 समाचार स्रोत न्यू भारत टाइम्स