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बच्चों के हेल्थ टॉनिक के नाम पर पशुओं का सप्लीमेंट बेचने का आरोप, सूरत में मेडिकल स्टोर संचालक गिरफ्तार
सूरत, गुजरात 15 अक्टूबर 2026
गुजरात के सूरत में बच्चों की सेहत से खिलवाड़ करने का गंभीर मामला सामने आया है। यहां पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले लिक्विड सप्लीमेंट को कथित तौर पर बच्चों का हेल्थ टॉनिक बताकर बेचने के आरोप में पुलिस ने एक मेडिकल स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला के रूप में हुई है। पुलिस ने गोपीपुरा इलाके में स्थित शांतिनाथ मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर कार्रवाई की। मामले में अठवा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पशुओं के सप्लीमेंट पर लगाता था बच्चों की दवा का लेबल
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपी पर पशुओं के लिए बनाए गए लिक्विड सप्लीमेंट को बड़े कैन से निकालकर छोटी बोतलों में भरने और उन पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले हेल्थ ड्रॉप्स के कथित नकली लेबल लगाने का आरोप है। संबंधित उत्पाद की पहचान Himalaya Liv.52 Protec Liquid Veterinary Feed Supplement के रूप में की गई है, जिसका इस्तेमाल पशुओं के लिए किया जाता है।
रात जानकारी के अनुसार आरोप है कि इस उत्पाद को Himalaya Liv.52 Drops के नाम से पेश करके ग्राहकों को बेचा जाता था। इस तरह उत्पाद की वास्तविक पहचान छिपाकर उसे बच्चों की भूख और वजन बढ़ाने वाले टॉनिक के रूप में बेचने की बात सामने आई है।
दोगुनी कीमत पर बिक्री का आरोप
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर इस उत्पाद को उसकी मूल कीमत से लगभग दोगुने दाम पर बेच रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उत्पाद, बोतलों, पैकेजिंग और अन्य सामग्री सहित कुल 31,195 रुपये मूल्य का सामान जब्त किया।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कथित रूप से दोबारा पैक किए गए उत्पाद की कितनी बोतलें बेची गईं, यह गतिविधि कब से चल रही थी और क्या किसी बच्चे को इसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी नुकसान पहुंचा है।
बच्चों की दवाओं की खरीद में सावधानी जरूरी
इस मामले ने बच्चों के लिए खरीदी जाने वाली दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को कोई भी दवा या सप्लीमेंट देने से पहले उसके लेबल, निर्माता और उपयोग संबंधी निर्देशों की जांच करें तथा चिकित्सक की सलाह लें। पशुओं के लिए तैयार उत्पाद को केवल नाम या पैकेजिंग के आधार पर बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
फिलहाल, आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच जारी है। गिरफ्तारी और प्राथमिकी दर्ज होना अपराध सिद्ध होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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