यूपी में सभी राशन कार्ड धारकों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा …….

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यूपी में सभी राशन कार्ड धारकों को मिल सकती है कैशलेस इलाज की सुविधा, 14.61 करोड़ लोगों को जोड़ने की तैयारी

लखनऊ 22 अक्टूबर 2026.

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के सभी राशन कार्ड धारकों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना से जोड़कर कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव चर्चा में है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल के तहत प्रदेश के करीब 3.63 करोड़ राशन कार्डों से जुड़े 14.61 करोड़ लाभार्थियों को योजना के दायरे में लाने की तैयारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और इसे लागू किया जाता है, तो बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सकता है, जो फिलहाल आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थियों में शामिल नहीं हैं।

3.63 करोड़ राशन कार्ड धारक परिवारों को जोड़ने की तैयारी

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अंत्योदय अन्न योजना के लाल राशन कार्ड और पात्र गृहस्थी श्रेणी के सफेद राशन कार्ड को मिलाकर लगभग 3.63 करोड़ राशन कार्ड हैं। इनसे जुड़े करीब 14.61 करोड़ लोगों को प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की योजना बताई गई है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यापक बनाना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान होने वाले भारी खर्च से राहत दिलाना है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी राशन कार्ड धारकों को शामिल करने के लिए पात्रता की क्या शर्तें होंगी और नई व्यवस्था किस तारीख से लागू की जाएगी।

पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा

आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है। योजना के निर्धारित पैकेज और नियमों के अनुसार पात्र उपचार कैशलेस तरीके से उपलब्ध कराया जाता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की जानकारी के मुताबिक, योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर उपचार के खर्च से सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में पात्रता के आधार पर लाभ मिलता है और उपचार सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।

सरकारी कर्मचारियों वाले परिवारों को लेकर भी चर्चा

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकारी नौकरी करने वाले सदस्यों वाले कुछ परिवार पहले से विभागीय स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। ऐसे परिवारों के संबंध में नई व्यवस्था में पात्रता और लाभों के समन्वय को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

यदि राशन कार्ड धारकों का दायरा बढ़ाया जाता है, तो सरकार को यह निर्धारित करना होगा कि पहले से किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना में शामिल परिवारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा और किन परिवारों को किस योजना के अंतर्गत उपचार की सुविधा मिलेगी।

सरकार पर बढ़ सकता है वित्तीय बोझ

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में इस तरह की स्वास्थ्य सुविधा पर लगभग छह हजार करोड़ रुपये वार्षिक खर्च होने का अनुमान बताया गया है। प्रस्तावित विस्तार के बाद यह खर्च बढ़कर करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना हो सकता है। इसके लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ सकती है।

हालांकि, ये आंकड़े प्रकाशित रिपोर्ट में दिए गए अनुमान हैं। प्रस्ताव की अंतिम लागत, बजट प्रावधान और योजना के क्रियान्वयन की समय-सीमा की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

बस्ती समेत प्रदेश के राशन कार्ड धारकों की नजरें फैसले पर

यदि प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर लागू करती है, तो बस्ती समेत उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के पात्र परिवारों को भी इसका लाभ मिल सकता है। इससे गंभीर बीमारी, ऑपरेशन और अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी।

फिलहाल राशन कार्ड धारकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल राशन कार्ड होना अपने आप में आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के इलाज की पात्रता की पुष्टि नहीं करता। नई व्यवस्था लागू होने पर पात्रता, आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और अस्पतालों में इलाज से संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

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