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यूपीआई से लेनदेन पर कोई फीस नहीं, 2000 करोड़ का खर्च खुद उठाएगी सरकार
नई दिल्ली, 3 फरवरी 26.
यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल लेनदेन को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर सरकार ने विराम लगा दिया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यूपीआई से लेनदेन आगे भी पूरी तरह मुफ्त रहेगा और इस पर आने वाले भारी खर्च को सरकार स्वयं वहन करेगी। इससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को राहत मिली है, जो रोजमर्रा के लेनदेन में यूपीआई पर निर्भर हैं।
वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि यूपीआई को बढ़ावा देने और इसे मुफ्त बनाए रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड से जुड़े लेनदेन के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि इस सिस्टम को चलाने में आने वाले खर्च की भरपाई के लिए सब्सिडी के रूप में दी जाएगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई लेनदेन की संख्या अब नकद लेनदेन से कई गुना अधिक हो चुकी है। इसी वजह से इसके तकनीकी रखरखाव, सर्वर, साइबर सुरक्षा और बैंकिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकार को हर साल करीब 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च उठाना पड़ता है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह राशि संशोधित अनुमान के अनुसार 2,196 करोड़ रुपये रही थी, जिसे अब अगले बजट में संतुलित किया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने भी बजट 2026-27 में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के लिए सब्सिडी जारी रखने की घोषणा की है। सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करना ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है और इसके लिए उपभोक्ताओं पर किसी तरह का शुल्क नहीं डाला जाना चाहिए।
साइबर फ्रॉड के मुद्दे पर वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि बैंकों की तकनीकी गड़बड़ियों से होने वाली धोखाधड़ी की हिस्सेदारी 3 फीसदी से भी कम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकांश मामलों में सतर्कता बरतकर साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सकता है। इसके साथ ही बैंकों के कामकाज में सुधार और निगरानी के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति के गठन का भी प्रस्ताव बजट में रखा गया है, जिसके नियम और शर्तें जल्द तय की जाएंगी।
सरकार के इस फैसले से साफ है कि यूपीआई न सिर्फ आगे भी मुफ्त रहेगा, बल्कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत इसे और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।
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