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गोरखपुर में गाय की मौत के बाद मचा हड़कंप, उसी के दूध से बना था चरणामृत; 450 लोगों ने लगवाई एंटी-रेबीज वैक्सीन
गोरखपुर 23 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक गाय की मौत के बाद दो गांवों के लोगों में रेबीज को लेकर चिंता फैल गई। मामला गोला ब्लॉक के डाड़ी खास गांव का है, जहां दुर्गा पूजा के दौरान जिस गाय के दूध से चरणामृत तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया गया था, उसकी कुछ दिनों बाद मौत हो गई। गाय को आवारा कुत्ते के काटने की आशंका सामने आने के बाद चरणामृत पीने वाले लोगों में हड़कंप मच गया। इसके बाद ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी शुरू कर दी।
गाय की मौत के बाद डाड़ी खास और गोविंदपुर में बढ़ी चिंता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डाड़ी खास गांव में दुर्गा पूजा के दौरान गाय के दूध से चरणामृत बनाया गया था। इसे डाड़ी खास के साथ पड़ोसी गोविंदपुर गांव के श्रद्धालुओं ने भी ग्रहण किया था। बताया गया कि गाय का दूध कुछ दुकानों और घरों तक भी पहुंचता था।
गाय के मालिक नवमी यादव के मुताबिक, गाय की तबीयत एक-दो दिनों से खराब थी। मंगलवार को उसकी हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे पशु चिकित्सकों को दिखाया गया। चिकित्सकों ने कुत्ते के काटने की आशंका जताई। बाद में गाय का व्यवहार असामान्य हो गया और मंगलवार देर शाम उसकी मौत हो गई।
दो दिनों में 450 लोगों को लगी वैक्सीन
गाय की मौत की जानकारी सामने आने के बाद चरणामृत पीने वाले ग्रामीणों ने एहतियातन एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र का रुख किया। 20 अक्टूबर को करीब 50 लोगों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर टीका लगवाया। इसके बाद 21 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डाड़ी खास गांव में शिविर लगाया और करीब 400 लोगों को वैक्सीन दी। इस तरह कुल संख्या लगभग 450 पहुंच गई।
फार्मासिस्ट सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों का टीकाकरण किया। अधिकारियों ने जरूरतमंद लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आगे की खुराक समय पर लगवाने की सलाह दी है।
क्या दूध से रेबीज फैलने की पुष्टि हुई?
इस घटना में गाय के रेबीज से संक्रमित होने की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। पशु चिकित्सकों ने उसके लक्षणों के आधार पर आशंका जताई थी। इसलिए गाय की मौत को रेबीज से हुई मौत मान लेना अभी उचित नहीं होगा।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, चरणामृत बनाने में इस्तेमाल किए गए दूध को उबाले जाने की बात सामने आई है। दूध को अच्छी तरह गर्म करने से रेबीज वायरस निष्क्रिय हो सकता है। सामान्य रूप से दूध पीना रेबीज संक्रमण का स्थापित मार्ग नहीं माना जाता, लेकिन यदि किसी व्यक्ति का संक्रमित पशु की लार या अन्य संभावित संक्रामक सामग्री से संपर्क हुआ हो, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
जिन लोगों ने संबंधित चरणामृत का सेवन किया था या जिन्हें किसी संभावित संपर्क को लेकर चिंता है, उन्हें स्वास्थ्य विभाग अथवा चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। एंटी-रेबीज वैक्सीन की आगे की खुराक डॉक्टर के निर्देशानुसार पूरी करनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के टीकाकरण का क्रम बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।
गोरखपुर की इस घटना ने धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की स्वच्छता, पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी और किसी भी संदिग्ध स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व को सामने ला दिया है।
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