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कासगंज में BDO का कथित कमीशन वीडियो वायरल, 10 प्रतिशत कमीशन के दावे से मचा हड़कंप; जांच समिति गठित
कासगंज 23 अक्टूबर 2026.
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के पटियाली विकासखंड में तैनात खंड विकास अधिकारी (BDO) संजीव कुमार से जुड़ा कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। वायरल वीडियो में सरकारी विकास कार्यों के बदले कथित तौर पर 10 प्रतिशत कमीशन लेने और उसमें से वरिष्ठ अधिकारियों को भी हिस्सा दिए जाने की बात कही जा रही है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बीडीओ को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है तथा उनके निलंबन के लिए शासन को पत्र भेजे जाने की खबर सामने आई है।
कथित वीडियो में कमीशन की चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में बीडीओ संजीव कुमार कथित तौर पर सरकारी काम के बदले कमीशन की व्यवस्था के बारे में बात करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में 10 प्रतिशत कमीशन तथा उसमें से कुछ हिस्सा जिला विकास अधिकारी (DDO) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) तक पहुंचाने की बात कहे जाने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद सरकारी विकास कार्यों में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों के वास्तविक संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि होना आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान, दो सदस्यीय जांच समिति गठित
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए बीडीओ संजीव कुमार को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। उनके निलंबन के लिए शासन को पत्र भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित किए जाने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, समिति में एडीएम न्यायिक मंजूर अहमद और एसडीएम सुनील कुमार को शामिल किया गया है। समिति वायरल वीडियो की सत्यता और उससे जुड़े आरोपों की जांच करेगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बीडीओ ने दी सफाई
मीडिया रिपोर्टों में बीडीओ संजीव कुमार की सफाई का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि उन्होंने कहा कि गुस्से में उनके मुंह से ऐसी बातें निकल गई थीं और उन्हें वीडियो बनाने के लिए उकसाया गया था।
उनकी सफाई और वायरल वीडियो में कही गई कथित बातों के बीच की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वीडियो की पूरी रिकॉर्डिंग, बातचीत का संदर्भ और अन्य उपलब्ध साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के नाम आने से बढ़ी गंभीरता
वीडियो में वरिष्ठ अधिकारियों तक कथित कमीशन पहुंचाने की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि, किसी अधिकारी का नाम वीडियो में लिए जाने मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। संबंधित अधिकारियों की भूमिका के बारे में निष्कर्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
यदि जांच में सरकारी कार्यों के बदले अवैध कमीशन लेने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल मामले में जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
पटियाली ब्लॉक से जुड़े इस मामले में अब जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई और जांच के परिणामों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और आगे किनके विरुद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है।
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