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पैड़ा वाले बाबा गोविंद दास के विषाक्त पदार्थ खाने का मामला गरमाया, बागेश्वर धाम की कथा से जोड़ने वाले दावों पर उठे सवाल; जांच की मांग
बस्ती 25 अक्टूबर 2026.
मजार से मंदिर तक का सफर तय करने वाले पैड़ा वाले बाबा गोविंद दास के कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ खाने की घटना के बाद जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आश्रम में फेसबुक लाइव के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई थी। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है और उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की आधिकारिक पुष्टि भी सामने आना बाकी है।
इस बीच, घटना को बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री की कथा में शामिल होने या कथा आयोजन से जोड़कर देखे जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में कुछ लोगों का कहना है कि किसी संत का किसी धार्मिक आयोजन में शामिल होना उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता है। किसी को जबरन कथा में बुलाने या शामिल होने के लिए दबाव बनाने का कोई औचित्य नहीं है। उनका यह भी कहना है कि धार्मिक आयोजन को लेकर मतभेद होने पर विषाक्त पदार्थ खाने जैसा कदम उठाना या किसी को ऐसा करने की सलाह देना उचित नहीं है।
वायरल वीडियो के अनुसार बाबा ने लाइव आकर बागेश्वर धाम की कथा ना करा पाने पर अफसोस चाहिए करते हुए तथा समाजसेवी मनीष मिश्रा से यह आग्रह करते हुए कि वह बागेश्वर धाम का कथा बस्ती में जरूर कराएंगे और अपने माता-पिता की देखभाल करने के लिए कहते हुए एक शीशी कोई तरल पदार्थ पी लिए.
पिछले घटनाक्रमों की जांच कराने की उठी मांग
घटना को लेकर कुछ लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष के दौरान बाबा की गाड़ी में आग लगने, बागेश्वर धाम की यात्रा के दौरान कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ दिए जाने और धार्मिक कथा आयोजन को लेकर सामने आए घटनाक्रमों की भी जांच की जानी चाहिए।
कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि मनीष मिश्रा द्वारा धीरेंद्र शास्त्री की कथा कराने की घोषणा के बाद बाबा के सार्वजनिक स्थानों पर जनसहयोग के लिए बैठने और फिर कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ खाने की घटना के बीच क्या कोई संबंध है। हालांकि, इन घटनाओं के बीच संबंध होने का कोई प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सभी पहलुओं की जांच जरूरी बताई जा रही है।
सहानुभूति पाने की चर्चा, लेकिन निष्कर्ष जांच के बाद ही
इस मामले में कुछ लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ खाने की घटनाओं के जरिए लोगों की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की जा रही हो सकती है। इसके समर्थन में बागेश्वर धाम जाते समय कथित तौर पर जहरखुरानी का शिकार होने की पुरानी घटना का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि, यह केवल कुछ लोगों की आशंका है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और बिना जांच के इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
प्रशासनिक जांच से स्पष्ट हो सकती है घटना की वजह
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पैड़ा वाले बाबा गोविंद दास ने किन परिस्थितियों में कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ का सेवन किया। घटना से पहले और बाद के घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्य, संबंधित लोगों के बयान तथा अन्य परिस्थितियों की जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
स्थानीय स्तर पर उठ रही मांग के बीच जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपेक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह पर रोक लगे और यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता या अपराध सामने आए तो तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो सके। जांच का उद्देश्य घटना की सच्चाई सामने लाना और किसी निर्दोष व्यक्ति को बिना प्रमाण के आरोपों में घिरने से बचाना होना चाहिए।
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