दीपावली में बड़े पैमाने पर नकली मिठाइयों को खपाने की तैयारी?…….

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दीपावली से पहले नकली मिठाइयों का बाजार गर्म! चमकदार मिठाइयों के पीछे सेहत से खिलवाड़ की तैयारी, खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल

बस्ती 2 नवंबर 2026.

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ने लगी है। बाजारों में रंग-बिरंगी और चमकदार मिठाइयों की दुकानें सजने की तैयारी है, लेकिन इसी के साथ मिलावटी और नकली मिठाइयों का कारोबार करने वाले सौदागरों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि त्योहार के दौरान बाजार में बड़े पैमाने पर मिलावटी मिठाइयां खपाने की तैयारी की जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो त्योहार की खुशियां लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती हैं।

चमकदार मिठाइयों के पीछे छिपा हो सकता है मिलावट का खेल

जानकारों और स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों के अनुसार, बाजार में आकर्षक रंग, अधिक चमक और कम कीमत वाली मिठाइयां ग्राहकों को अपनी ओर खींचती हैं। खासकर छेना और दूध से तैयार होने वाली मिठाइयों की मांग त्योहारों में काफी बढ़ जाती है। इसी मांग का फायदा उठाकर कथित तौर पर कुछ कारोबारी घटिया गुणवत्ता और मिलावटी सामग्री से तैयार मिठाइयां बाजार में उतारने की तैयारी करते हैं। ग्राहक अक्सर मिठाइयों की चमक और सस्ते दाम देखकर खरीदारी कर लेते हैं, जबकि उनकी गुणवत्ता की जांच नहीं हो पाती।

छोटे-बड़े दुकानदारों तक पहुंचता है मिठाइयों का नेटवर्क

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कारोबार का नेटवर्क केवल पारंपरिक मिठाई की दुकानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों और त्योहार के दौरान अस्थायी रूप से मिठाई बेचने वाले दुकानदारों तक इसकी पहुंच होती है। आरोप यह भी हैं कि कुछ थोक कारोबारी दुकानदारों को ऐसी व्यवस्था देते हैं कि मिठाई नहीं बिकने पर बचा हुआ माल वापस कर दिया जाता है। इससे दुकानदारों का जोखिम कम हो जाता है और कथित तौर पर मिलावटी मिठाइयों की आपूर्ति का कारोबार लगातार चलता रहता है। इनके के निशाने पर अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के दुकानदार होते हैं |

खाद्य विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग केवल कुछ दुकानों पर नमूने लेकर और छिटपुट कार्रवाई करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगा, या फिर मिठाइयों की आपूर्ति करने वाले थोक कारोबारियों और निर्माण केंद्रों तक भी पहुंचेगा? स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि जांच और कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव रहता है। कुछ लोगों का दावा है कि त्योहारों के दौरान कथित वसूली का खेल भी चलता है और मनमानी न करने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जाती है।

बाहरी टीम के आने से पहले सूचना पहुंचने का भी आरोप

सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब खाद्य विभाग की बाहरी या विशेष जांच टीम कार्रवाई के लिए पहुंचती है तो स्थानीय स्तर पर कुछ संबंधित दुकानदारों को पहले ही इसकी जानकारी मिल जाने की चर्चा रहती है।

त्योहार से पहले हो व्यापक जांच, दोषियों पर हो कार्रवाई

दीपावली पर मिठाइयों की खरीदारी हर घर की परंपरा है। ऐसे में प्रशासन और खाद्य विभाग को चाहिए कि केवल फुटकर दुकानों तक सीमित रहने के बजाय मिठाइयों के निर्माण केंद्रों, गोदामों, थोक आपूर्तिकर्ताओं और बड़े प्रतिष्ठानों की भी सघन जांच कराई जाए। संदिग्ध मिठाइयों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए तथा मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

आखिर सवाल यह है कि त्योहार पर मिठास बांटने के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर कब प्रभावी शिकंजा कसेगा? दीपावली की खुशियां बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की शुद्धता सुनिश्चित हो और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई निष्पक्ष एवं पारदर्शी दिखाई दे।

📍 अब देखना यह है कि नकली मिठाइयों को रोकने में खाद्य विभाग कितना कामयाब होता है |

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