Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

पाऊ कस्बे में निराश्रित गोवंशों का जमावड़ा, किसानों की फसलें हो रहीं बर्बाद, सड़क हादसों का भी खतरा
बस्ती 1 नवंबर 2026.
प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण और निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए लगातार योजनाएं संचालित कर रही है। इसके बावजूद बस्ती जिले के पाऊ कस्बे में सड़कों और गलियों में घूम रहे निराश्रित गोवंश सरकार की गोवंश संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कलवारी-गायघाट रामजानकी मार्ग स्थित पाऊ कस्बे में बड़ी संख्या में गोवंश सड़कों और गलियों में घूमते दिखाई दे रहे हैं। इनकी बढ़ती संख्या से स्थानीय लोगों, किसानों और राहगीरों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों से लेकर गलियों तक गोवंशों का जमावड़ा
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और जानकारी के अनुसार पाऊ कस्बे की मुख्य सड़क के साथ-साथ अंदरूनी गलियों में भी बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश घूम रहे हैं। ये पशु भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। कई बार सड़कों पर इनके अचानक आ जाने से वाहन चालकों को परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
किसानों की फसलों को पहुंच रहा नुकसान
निराश्रित गोवंशों की समस्या का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। खेतों में पहुंचकर ये पशु किसानों की खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। पहले से ही खेती की लागत और मेहनत से जूझ रहे किसानों के सामने फसलों की सुरक्षा एक अतिरिक्त चुनौती बन गई है।
गोशालाएं संचालित होने के बावजूद क्यों भटक रहे गोवंश?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश में निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए गोशालाएं संचालित की जा रही हैं, तो पाऊ कस्बे में घूम रहे इन पशुओं को सुरक्षित आश्रय क्यों नहीं मिल पा रहा है? क्या संबंधित गोशालाओं में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध नहीं है? क्या पशुओं को संरक्षित करने के लिए नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा है? इन सवालों पर संबंधित विभाग और प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पाऊ कस्बे में घूम रहे निराश्रित गोवंशों को चिह्नित कर उन्हें नजदीकी गोशाला में सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही गोशालाओं की क्षमता, चारे, पानी और पशुओं की देखभाल की व्यवस्था का भी निरीक्षण कराया जाए, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
गोवंश संरक्षण की सफलता केवल योजनाओं और सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि सड़कों और खेतों में भटक रहे बेजुबानों को कितना सुरक्षित आश्रय मिल पा रहा है। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का संज्ञान लें, जिससे गोवंशों को संरक्षण मिलने के साथ किसानों की फसलें और आम राहगीरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
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