NGV PRAKASH NEWS


नई दिल्ली।
30 सितंबर 2025
सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी 88 चल-अचल संपत्तियों को अदाणी समूह को बेचने की अनुमति मांगी है। इन संपत्तियों में महाराष्ट्र स्थित ऐंबी वैली और लखनऊ का सहारा सिटी भी शामिल है। समूह का कहना है कि देनदारियों का भुगतान करने और अवमानना कार्यवाही को समाप्त करने के लिए यह मंजूरी जरूरी है। शीर्ष अदालत इस मामले पर 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
अदाणी समूह के साथ टर्म शीट
सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL) ने अपनी याचिका में बताया है कि अदाणी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ 6 सितंबर 2025 को नियम और शर्तों से जुड़ी टर्म शीट पर सहमति बन चुकी है। यदि सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलती है, तो यह सहारा की अब तक की सबसे बड़ी डील होगी।
सेबी खाते में 16 हजार करोड़ जमा
सहारा समूह ने बयान जारी कर कहा कि सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं का बकाया चुकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 24,030 करोड़ रुपये सेबी के रिफंड खाते में जमा करने का आदेश दिया था। इसमें से 16 हजार करोड़ रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं। समूह का कहना है कि प्रतिष्ठित एस्टेट ब्रोकरेज कंपनियों की सेवाएं लेने के बावजूद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) उसकी परिसंपत्तियों को बेचने में असफल रहा है।
सुब्रत राय के निधन के बाद बदलाव
याचिका में कहा गया कि नवंबर 2023 में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय के निधन के बाद समूह ने अपना सबसे बड़ा निर्णयकर्ता खो दिया। परिवार के सदस्य दैनिक प्रबंधन में सक्रिय नहीं थे, लेकिन निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए परिसंपत्तियों को शीघ्र बेचने का फैसला लिया गया है।
निवेशकों के हित सर्वोपरि
सहारा समूह ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सभी हितधारकों, खासकर निवेशकों के हित में लिया गया है। समूह का कहना है कि संपत्तियों की बिक्री से देनदारियों का निपटारा होगा और सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेशों का पालन करते हुए मौजूदा अवमानना कार्यवाही भी समाप्त हो सकेगी।
बड़ी डील से क्या होगा असर?
यदि अदालत से अनुमति मिलती है, तो अदाणी समूह रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करेगा, जबकि सहारा समूह को निवेशकों का बकाया लौटाने में बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, यह डील भारतीय कॉरपोरेट जगत में रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की सबसे चर्चित सौदों में से एक साबित हो सकती है।
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