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सहारा सहर पर सहारा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, याचिका खारिज, सरकार की कार्रवाई बरकरार
दिल्ली/लखनऊ, 17 मार्च 2026.
सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ स्थित चर्चित ‘सहारा सहर’ की लीज रद्द कर कब्जा लेने के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद राज्य सरकार की कार्रवाई को कानूनी मजबूती मिल गई है और सहारा सहर पर अब सहारा समूह का दावा लगभग समाप्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस मामले (SLP(C) No. 007733/2026) की सुनवाई 16 मार्च 2026 को हुई, जिसमें न्यायमूर्ति पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे ‘डिसमिस्ड’ करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
मामले की पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहारा सहर की लीज को निरस्त करना और उसके बाद प्रशासन द्वारा परिसर को अपने कब्जे में लेना शामिल है। सरकार का तर्क था कि लीज की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। इसके खिलाफ सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि सहारा सहर पर राज्य सरकार का नियंत्रण बना रहेगा और सहारा समूह को इस मामले में कोई राहत नहीं मिली है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्रवाई को वैधता मिली है और भविष्य में इस परिसर के उपयोग को लेकर सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेगी। वहीं, सहारा समूह के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उसके एक प्रमुख प्रोजेक्ट पर नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो गया है।
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