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लूंड्रा में एक ही कुर्सी पर 9 साल से जमे RES SDO, ट्रांसफर नीति पर उठे बड़े सवाल
📍 छत्तीसगढ़ से मेघा तिवारी की विशेष रिपोर्ट
सरगुजा (छत्तीसगढ़), 13 मार्च 2026.
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक पारदर्शिता और जीरो टॉलरेंस की नीति को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख की बात करती रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी भी वर्तमान में सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शर्मा के पास है, जिन्हें प्रशासनिक सख्ती और साफ-सुथरी कार्यशैली के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद सरगुजा जिले के लूंड्रा जनपद से सामने आया एक मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग में पदस्थ एक उप संभागीय अधिकारी (SDO) 1 अगस्त 2016 से लगातार लूंड्रा में ही तैनात हैं। यानी करीब नौ वर्षों से अधिक समय से वे एक ही स्थान पर पदस्थ बने हुए हैं। सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के तहत शासन समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण और फेरबदल करता है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और कार्यप्रणाली संतुलित ढंग से संचालित हो सके। आमतौर पर एक ही स्थान पर किसी अधिकारी की अधिकतम पदस्थापना अवधि तीन वर्ष के आसपास मानी जाती है, लेकिन लूंड्रा में यह व्यवस्था लागू होती नजर नहीं आ रही।
लगातार एक ही स्थान पर इतने लंबे समय तक पदस्थ रहने को लेकर अब स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या RES विभाग में ट्रांसफर नीति लागू नहीं होती, या फिर किसी विशेष प्रशासनिक अनुमति के तहत संबंधित अधिकारी को यहीं बनाए रखा गया है। कुछ लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि कहीं उन्हें किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण तो प्राप्त नहीं है।
इस मामले में जब RES विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) सरगुजा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस विषय में निर्णय शासन स्तर पर होता है और उनके स्तर से अधिक हस्तक्षेप संभव नहीं है। उनका कहना था कि समय-समय पर शासन को यह जानकारी भेजी जाती है कि कौन-कौन अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, लेकिन अंतिम निर्णय शासन स्तर से ही लिया जाता है।
इसके बावजूद यह सवाल लगातार बना हुआ है कि यदि शासन को नियमित रूप से ऐसी जानकारी भेजी जाती है तो लूंड्रा में पदस्थ इस RES SDO का अब तक स्थानांतरण क्यों नहीं हुआ। इस स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जाने लगा है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो संभव है कि संबंधित अधिकारी की सेवा अवधि का बड़ा हिस्सा इसी जनपद में बीत जाए।
प्रशासनिक हलकों में यह मामला अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। आमतौर पर पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण किया जाता है, लेकिन लूंड्रा के इस प्रकरण ने उस व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार और संबंधित विभाग इस मामले को किस तरह से लेते हैं और क्या इस पर कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने आती है।
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