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बस्ती में ‘DL घोटाला’—नंबरों के खेल में करोड़ों की कमाई, फर्जी लाइसेंस का पूरा हिसाब-किताब सामने
बस्ती, 28 अप्रैल 2026.
बस्ती में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले सिंडिकेट का मामला अब सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि नंबरों के साथ खुलती पूरी कहानी बन गया है। जांच में ऐसे-ऐसे लाइसेंस नंबर सामने आए हैं, जो बताते हैं कि नियमों को किस तरह “फाइलों में घुमाकर” सड़क पर उतार दिया गया।
खुलासे के मुताबिक, अलग-अलग जिलों के आवेदकों के लाइसेंस को अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा और सियांग से बैकलॉग एंट्री दिखाकर बस्ती से जारी किया गया। उदाहरण के तौर पर—
रामतीरथ मौर्य का DL नंबर UP63 20180030028 बताया गया, जिसकी मूल एंट्री मिर्जापुर से जुड़ी है, लेकिन बैकलॉग एंट्री सेप्पा (अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में दिखाकर 2026 में बस्ती से एड्रेस चेंज कर लाइसेंस बना दिया गया।
इसी तरह मनीष यादव का DL नंबर UP57 20170098799 (पडरौना) सामने आया, जिसमें 2017 की एंट्री सेप्पा से दिखाई गई और बाद में बस्ती से रिन्यूवल कर दिया गया।
करण गुप्ता का DL नंबर UP51 20200018137 भी जांच के दायरे में है, जिसकी बैकलॉग एंट्री सियांग (अरुणाचल प्रदेश) से दिखाकर बस्ती से लाइसेंस जारी किया गया।
इसके अलावा जांच में कई अन्य संदिग्ध लाइसेंस नंबर सामने आए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
UP51 20200034451, UP53 20190077236, UP57 20170098787, UP63 20180030001, UP63 20180030028, UP53 20190077236 शामिल हैं। इन सभी मामलों में एक जैसी पैटर्न दिख रही है—बैकलॉग एंट्री बाहर की, प्रोसेस बस्ती से, और नियमों को साइड में रखकर सीधा लाइसेंस तैयार।
जांच में यह भी सामने आया कि कई आवेदकों का लर्नर लाइसेंस बना ही नहीं, जबकि नियम के अनुसार पहले लर्नर, फिर टेस्ट और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के बाद ही स्थायी लाइसेंस जारी होता है। लेकिन इस सिंडिकेट ने “नो टेस्ट, डायरेक्ट पास” का अपना सिस्टम बना लिया था।
इतना ही नहीं, भारी वाहन (हेवी) लाइसेंस के लिए एक साल पुराने डीएल की अनिवार्यता को भी नजरअंदाज किया गया। यानी अनुभव हो या न हो—लाइसेंस मिलना तय था, बस रकम पूरी होनी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क ने करीब 4500 से अधिक लाइसेंस बनवाए और प्रति लाइसेंस औसतन 10 हजार रुपये वसूले गए, जिससे लगभग 4.75 करोड़ रुपये का खेल सामने आया है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लाइसेंस जारी होना बिना सिस्टम की जानकारी के संभव नहीं माना जा रहा।
आरटीओ बस्ती ने बयान दिया है कि सामने आए करीब 45 लाइसेंस नंबरों की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती तौर पर पिछले 6 महीनों के रिकॉर्ड को खंगाला जाएगा और जो भी लाइसेंस नियम विरुद्ध पाए जाएंगे, उन्हें निरस्त किया जाएगा। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात भी कही गई है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच सिर्फ चुनिंदा नंबरों तक सीमित रहेगी या पूरे “DL सिंडिकेट” का असली नेटवर्क उजागर होगा। क्योंकि यहां खेल सिर्फ नंबरों का नहीं, सड़क पर दौड़ती हर गाड़ी और उससे जुड़ी हर जिंदगी की सुरक्षा का है।
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