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खाद्य तेल कंपनियों की मनमानी पर सरकार का बड़ा प्रहार, अब तय मात्रा में ही बिकेगा खाने का तेल
नई दिल्ली। रसोई में इस्तेमाल होने वाले सरसों, सोयाबीन और अन्य खाद्य तेलों की खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। लंबे समय से कंपनियां अलग-अलग मात्रा के पैकेट बाजार में उतारकर ग्राहकों को भ्रमित करती रही हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। सरकार ने खाद्य तेल की पैकेजिंग को लेकर सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद 900 मिलीलीटर, 950 मिलीलीटर जैसे पैकेट धीरे-धीरे बाजार से गायब हो जाएंगे।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना, मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लाना और कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाना है। अब ग्राहकों को यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा तेल किस कीमत पर मिल रहा है और कौन सा विकल्प उनके लिए अधिक लाभदायक है।
क्या है सरकार का नया नियम?
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कानूनी माप विज्ञान नियमों में संशोधन करते हुए खाद्य तेल की पैकेजिंग के लिए निश्चित मानक तय कर दिए हैं। अब कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी मात्रा में तेल पैक करके नहीं बेच सकेंगी। उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित पैकेजिंग मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
यह नियम देश में निर्मित होने वाले खाद्य तेलों के साथ-साथ विदेशों से आयात किए जाने वाले खाद्य तेलों पर भी समान रूप से लागू होगा।
अब केवल इन निर्धारित मात्राओं में मिलेगा खाद्य तेल
सरकार ने खाद्य तेल की बिक्री के लिए कुल नौ मानक पैक निर्धारित किए हैं। अब बाजार में मुख्य रूप से निम्नलिखित मात्राओं में ही तेल उपलब्ध होगा—
- 200 मिलीलीटर
- 500 मिलीलीटर
- 1 लीटर
- 2 लीटर
- 3 लीटर
- 4 लीटर
- 5 लीटर
- 15 लीटर
- 20 लीटर
इस निर्णय के बाद 900 मिलीलीटर, 950 मिलीलीटर अथवा अन्य अनियमित मात्रा वाले पैकेटों की बिक्री पर रोक लग जाएगी।
किन-किन तेलों पर लागू होगा नियम?
यह व्यवस्था देश में उपयोग किए जाने वाले लगभग सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू होगी। इनमें शामिल हैं—
- पाम तेल
- सोयाबीन तेल
- सूरजमुखी तेल
- सरसों का तेल
- मूंगफली का तेल
- तिल का तेल
- चावल की भूसी से निर्मित तेल
- कपास बीज का तेल
- मक्का का तेल
अब पैकेट पर वजन लिखना भी होगा अनिवार्य
सरकार ने उपभोक्ताओं को अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया है। अब कंपनियों को तेल की मात्रा के साथ उसका वास्तविक वजन भी पैकेट पर अंकित करना होगा।
अर्थात यदि किसी पैकेट पर एक लीटर तेल लिखा है तो उसके समतुल्य वजन को भी किलोग्राम में स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा। इससे ग्राहकों को उत्पाद की सही जानकारी मिलेगी और किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा।
छोटे उपभोक्ताओं को राहत
सरकार ने 200 मिलीलीटर से कम मात्रा वाले कुछ छोटे पैकेटों को इस नियम से छूट दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम आय वाले परिवारों और दैनिक जरूरत के अनुसार छोटी मात्रा में तेल खरीदने वाले उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कंपनियों को मिला तीन महीने का समय
नए नियमों के अनुपालन के लिए निर्माताओं, पैकेजिंग करने वाली इकाइयों और आयातकों को तीन महीने की अवधि दी गई है। इस दौरान वे अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग में आवश्यक बदलाव कर सकेंगे। हालांकि इच्छुक कंपनियां इन नियमों को निर्धारित समय से पहले भी लागू कर सकती हैं।
उपभोक्ताओं को होगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि जब सभी कंपनियां एक जैसी निर्धारित मात्राओं में तेल बेचेंगी तो उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न ब्रांडों की कीमतों की तुलना करना आसान हो जाएगा। इससे खरीदारी के समय होने वाला भ्रम समाप्त होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहक अपने पैसे का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेगा बल्कि खाद्य तेल बाजार में लंबे समय से चली आ रही पैकेजिंग संबंधी अनियमितताओं पर भी प्रभावी अंकुश लगाएगा। अब ग्राहकों को सही मात्रा, स्पष्ट जानकारी और निष्पक्ष मूल्य तुलना का लाभ मिल सकेगा।
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