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उखड़कर गिरा पीपल फिर खड़ा, गांव में उमड़ी भीड़;क्या है कारण
बरसठी (जौनपुर), 22 जुलाई 2026।
बरसठी क्षेत्र के चतुर्भुजपुर गांव से निकुम्भनपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित करीब 100 वर्ष पुराने पीपल के पेड़ के दो माह बाद दोबारा खड़ा दिखाई देने की घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। रविवार सुबह जब ग्रामीणों ने पेड़ को सीधी अवस्था में देखा तो देखते ही देखते सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए। कई ग्रामीणों ने इसे आस्था से जोड़ते हुए ‘पिपलेश्वर’ के जयकारे लगाए, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैज्ञानिक जांच के इसे चमत्कार या दैवीय घटना कहना उचित नहीं होगा।
ग्रामीणों के अनुसार 13 मई को आई भीषण आंधी में यह विशाल पीपल का वृक्ष जड़ों समेत उखड़कर गिर गया था। गिरने से गांव निवासी गिरजा शंकर दुबे सहित आसपास के कई मकानों को नुकसान पहुंचा था और सड़क भी अवरुद्ध हो गई थी। रास्ता चालू कराने के लिए ग्रामीणों ने पेड़ की अधिकांश शाखाएं काट दी थीं, लेकिन विशाल तना और जड़ें वहीं छोड़ दी गई थीं। बाद में उसे जेसीबी या क्रेन की मदद से हटाने की योजना बनाई जा रही थी।
ग्रामीणों का दावा है कि शनिवार शाम तक पेड़ जमीन पर ही पड़ा था, लेकिन रविवार सुबह वही विशाल तना जड़ों के सहारे खड़ा दिखाई दिया। इसे देखकर पूरे गांव में कौतूहल फैल गया। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और कई लोगों ने इसे दैवीय संकेत मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
➡️📍💥हालांकि, वनस्पति विज्ञान और भू-विज्ञान के जानकारों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे प्राकृतिक कारण भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि पेड़ की कुछ मजबूत जड़ें मिट्टी में बनी रही हों, शाखाएं काटे जाने से उसका भार कम हो गया हो तथा लगातार बारिश के कारण मिट्टी की स्थिति और संतुलन में बदलाव आया हो, तो तने की स्थिति बदल सकती है। वहीं यह संभावना भी जताई जा रही है कि किसी यांत्रिक साधन या मानवीय प्रयास से पेड़ को खड़ा किया गया हो। इन सभी संभावनाओं की पुष्टि केवल मौके की तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।
📍विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वन विभाग, वनस्पति वैज्ञानिक और भू-वैज्ञानिकों द्वारा पेड़ की जड़ों, मिट्टी की संरचना और आसपास की परिस्थितियों का परीक्षण किया जाना आवश्यक है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ प्राकृतिक कारणों से खड़ा हुआ, किसी बाहरी सहायता से सीधा किया गया या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।
फिलहाल यह अनोखी घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा और कौतूहल का विषय बनी हुई है। एक ओर जहां बड़ी संख्या में लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले लोग इसके वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की जांच का इंतजार करने की बात कह रहे हैं।
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