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रेल के AC कोचों से 4 साल में 1.27 करोड़ चादर, तौलिया और कंबल गायब, ₹104 करोड़ से ज्यादा का नुकसान; RTI रिपोर्ट ने खोली यात्रियों की लापरवाही की परत
नई दिल्ली, 13 जुलाई 2026। देश में भ्रष्टाचार को लेकर अक्सर सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, लेकिन एक हालिया आरटीआई जांच ने समाज के उस चेहरे को भी सामने ला दिया है, जिस पर कम ही चर्चा होती है। भारतीय रेल के एसी कोचों से पिछले चार वर्षों में यात्रियों द्वारा चादर, तौलिया, कंबल, तकिया और तकिया कवर जैसे बेडरोल सामान बड़े पैमाने पर गायब किए गए हैं। इन चोरी हुए सामानों की कुल संख्या 1.27 करोड़ से अधिक है, जिसकी अनुमानित कीमत 104.51 करोड़ रुपये बताई गई है।
दशको पहले सुनाई देता था कि पैसेंजर गाड़ियों से बल्ब, सीसा और फोम के सीटों पर लगे कवर को लोग चुरा लेते थे, लेकिन आप भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वाले सम्राट व्यक्ति जो किसी फर्स्ट,सेकंड और थर्ड में यात्रा करते हैं उनके द्वारा तौलिया,कंबल, बेड शीट और तकिए के कवर चोरी कर रेलवे को चूना लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं | यहां बात वही हुई कोई व्यक्ति कितना भी संभ्रान्त क्यों ना हो वह तब तक ही ईमानदार है जब तक उसे चोरी करने का मौका नहीं मिलता |
या हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इंडियन एक्सप्रेस की आरटीआई रिपोर्ट में या खुलासा हुआ है |
इंडियन एक्सप्रेस की आरटीआई आधारित जांच के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 तक रेलवे की 69 में से 54 मंडलों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के बाद जब ट्रेनों में बेडरोल सेवा दोबारा शुरू हुई, तभी से चोरी की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2022 की तुलना में 2025 तक ऐसी घटनाओं में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
रिपोर्ट में सामने आया कि बीकानेर मंडल में सबसे अधिक चादरें चोरी हुईं, जबकि दिल्ली, रांची और मुंबई मंडलों में तौलियों की चोरी सबसे ज्यादा दर्ज की गई। जोधपुर में कंबल और सोनपुर व बिलासपुर में तकिया कवर सबसे अधिक गायब हुए। रेलवे अधिकारियों का अनुमान है कि लगभग हर 1,000 एसी यात्रियों में से एक यात्री कम से कम एक बेडरोल सामान अपने साथ ले जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन सामानों का वित्तीय बोझ सीधे बेडरोल सेवा देने वाले ठेकेदारों पर पड़ता है। कई मामलों में ठेकेदार यह नुकसान कोच अटेंडेंट के वेतन से वसूलते हैं। रेलवे ने चोरी रोकने के लिए बेडरोल वितरण कर्मियों की निगरानी बढ़ाने, यात्रियों को जागरूक करने, सीसीटीवी निगरानी और ‘कोच मित्र’ जैसे डिजिटल सिस्टम के बेहतर उपयोग सहित कई कदम उठाने की योजना बनाई है।
यह मामला केवल रेलवे संपत्ति की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सार्वजनिक संपत्ति अंततः जनता के ही टैक्स के पैसे से तैयार और संचालित होती है। ऐसे में चादर, तौलिया या कंबल जैसी छोटी वस्तुओं की चोरी भी करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा देती है, जिसका असर रेल सेवाओं और ईमानदार यात्रियों पर पड़ता है।
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