NGV PRAKASH NEWS

चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर, खुदरा कीमत 65 रुपये किलो तक पहुंची, त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है मुश्किल
नई दिल्ली | 19 अगस्त 2026
एक महीने में 42 से 65 रुपये किलो पहुंची चीनी
देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश की एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव मंगलवार को 5,400 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया। इस पर 5 फीसदी जीएसटी अलग से लागू होता है। वहीं खुदरा बाजार में जिस चीनी की कीमत करीब एक महीने पहले 45 रुपये प्रति किलो थी, वह बढ़कर कई जगहों पर 62 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। चीनी की कीमतों में यह तेजी उत्पादन में कमी, निर्यात और इथेनॉल उत्पादन के कारण उपलब्ध स्टॉक में संभावित कमी से जुड़ी बताई जा रही है।
महाराष्ट्र और दिल्ली में भी बढ़े दाम
चीनी की कीमतों में तेजी केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र में चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव करीब 5,300 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। जीएसटी जोड़ने के बाद यह कीमत करीब 5,550 से 5,600 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच रही है।
दिल्ली के थोक बाजार में चीनी का भाव करीब 5,800 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। पिछले दो महीनों में थोक कीमतों में लगभग 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों और बाजार भाव में बड़ा अंतर
चीनी की कीमतों को लेकर सरकारी आंकड़ों और बाजार में दिखाई दे रही कीमतों के बीच भी अंतर नजर आ रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की दर निगरानी डिविजन के आंकड़ों के मुताबिक चीनी का औसत दैनिक खुदरा मूल्य 51.68 रुपये प्रति किलो है।
वहीं कई बाजारों में उपभोक्ताओं को चीनी 62 से 65 रुपये प्रति किलो तक खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में वास्तविक बाजार कीमत और सरकारी औसत के बीच करीब 10 से 13 रुपये प्रति किलो तक का अंतर दिखाई दे रहा है।
कम स्टॉक से बढ़ा आपूर्ति का दबाव
उत्पादन सीजन के शुरुआती अनुमानों और वास्तविक उत्पादन के आंकड़ों के बीच अंतर को भी चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी की एक वजह बताया जा रहा है। निर्यात और इथेनॉल उत्पादन के कारण घरेलू उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ा है।
अनुमान है कि 30 सितंबर 2026 को चालू सीजन समाप्त होने पर देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 30 से 33 लाख टन रह सकता है। यह कई दशकों में सबसे निचले स्तरों में से एक होगा। इसका असर 2026-27 के नए सीजन के शुरुआती महीनों में आपूर्ति पर पड़ सकता है।
सरकार ने तय की भंडारण सीमा
घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में चीनी के भंडारण की सीमा निर्धारित की है। प्रत्येक डीलर के लिए यह सीमा 4,000 कुंतल तय की गई है।
हालांकि, व्यापार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि भंडारण सीमा तय होने के बाद भी ट्रेडर्स और बिचौलियों की ओर से चीनी का स्टॉक जमा किया जा रहा है। इससे कीमतों को नियंत्रित करने के बजाय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ी है।
चीनी मिलों पर भी सरकार की नजर
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। खाद्य मंत्रालय की ओर से चीनी मिलों में स्टॉक के भौतिक सत्यापन का आदेश दिया गया था।
14 अगस्त को चीनी निदेशालय की ओर से चीनी मिलों को भेजे गए पत्र में स्टॉक में संभावित विसंगतियों और सौदे होने के बाद चीनी की आपूर्ति में देरी को लेकर चिंता जताई गई। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर आवश्यक वस्तु कानून और शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 2025 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
आयात का विकल्प भी खुल सकता है
अगर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव जारी रहा तो सरकार के सामने चीनी आयात का विकल्प भी आ सकता है। फिलहाल केंद्र सरकार ने चीनी के आयात पर 100 फीसदी सीमा शुल्क लगा रखा है।
हालांकि, शुल्क-मुक्त आयात का फैसला घरेलू चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। दूसरी ओर त्योहारी सीजन में महंगी चीनी का बोझ सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।
जल्द शुरू हो सकती है नए सीजन की पेराई
बाजार में आपूर्ति का दबाव कम करने के लिए कुछ चीनी मिलों ने आगामी पेराई सीजन को सामान्य समय से पहले शुरू करने की पेशकश की है। इसके बदले मिलों की ओर से जीएसटी में छूट जैसी रियायतों की मांग की गई है।
हालांकि, व्यावहारिक और तकनीकी कारणों से समय से पहले पेराई शुरू करना आसान नहीं माना जा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती त्योहारी सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखना है।
सरकार द्वारा चीनी मिलों में स्टॉक के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आधिकारिक स्टॉक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। यदि सरकार वास्तविक भंडारण का आधिकारिक आंकड़ा जारी करती है तो बाजार में चल रही अटकलों और कीमतों को लेकर अनिश्चितता कम करने में मदद मिल सकती है।
NGV PRAKASH NEWS