जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई…! 3 दिन बाद मलबे से जिंदा निकली 6 साल की मासूम…….

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जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई…!

तीन दिन तक मलबे में दबी रही 6 साल की मासूम, मौत को मात देकर निकली जिंदा

काठमांडू | 30 अगस्त 2026

कहते हैं—“जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई।” नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच इस कहावत को सच कर देने वाला एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

रसुवा जिले के तिमुरे गांव में बाढ़ और तबाही के तीन दिन बाद एक छह साल की मासूम बच्ची को कीचड़ और मलबे के नीचे से जिंदा बाहर निकाला गया। चारों तरफ तबाही का मंजर था, जिंदगी के निशान तलाशना किसी चमत्कार से कम नहीं था। लेकिन उम्मीद ने हार नहीं मानी।

बचे लोगों की तलाश में जुटे आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के जवानों को अचानक मिट्टी और मलबे के नीचे से एक मासूम के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। जवानों ने बिना वक्त गंवाए हाथों से और उपकरणों की मदद से खुदाई शुरू कर दी।

जैसे-जैसे मलबा हटता गया, उम्मीद की एक किरण दिखाई देने लगी… और आखिरकार वह मासूम जिंदा बाहर निकल आई।

जिस जगह से मौत का सन्नाटा सुनाई दे रहा था, वहीं से जिंदगी की आवाज निकली। रेस्क्यू टीम के लिए भी यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था।

बिगड़ी हालत तो हेलिकॉप्टर से काठमांडू भेजा

बच्ची को तत्काल तिमुरे स्थित APF बॉर्डर आउटपोस्ट पर प्राथमिक उपचार दिया गया। हालांकि उसकी हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए काठमांडू ले जाने का फैसला किया गया।

शुक्रवार शाम उसे एयरलिफ्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण उड़ान में देरी हुई। बचावकर्मियों ने शनिवार दोपहर तक उसकी हालत स्थिर बनाए रखी। मौसम साफ होने के बाद आखिरकार उसे हेलिकॉप्टर से काठमांडू के अस्पताल पहुंचाया गया।

फिलहाल मासूम का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है।

इस पूरे रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग बचावकर्मियों की हिम्मत और जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

तीन दिन मलबे में… फिर भी जिंदगी जीत गई

नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों को उजाड़ दिया। अब तक 768 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

तबाही के इस दौर में मलबे के नीचे से तीन दिन बाद एक छह साल की बच्ची का जिंदा मिलना सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि उम्मीद, हिम्मत और जिंदगी की जीत की कहानी है।

सच ही कहा है—
“जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई…”

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