बारिश के चलते ही बिजली कंपनियों पास मात्र इतने दिनों का ही बचा कोयला; क्या होगा आगे…….

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मानसून की लंबी बारिश से घटा ताप बिजली संयंत्रों का कोयला स्टॉक, 17 दिन से 9 दिन पर पहुंचा

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026।

देश के कई हिस्सों में मानसून के दौरान हुई लंबी बारिश का असर कोयला उत्पादन और उसकी ढुलाई पर पड़ा है। ताप बिजली संयंत्रों के पास उपलब्ध औसत कोयला स्टॉक करीब दो महीने पहले जहां 17 दिनों का था, वहीं अब घटकर लगभग 9 दिनों का रह गया है। हालांकि, कोयला मंत्रालय का कहना है कि पूर्वी-मध्य भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में बारिश कम होने के बाद उत्पादन और ढुलाई में तेजी आने लगी है।

मंत्रालय के मुताबिक सितंबर के शुरुआती तीन बारिश वाले दिनों में कोयले का औसत दैनिक उत्पादन करीब 13.6 लाख टन रहा, जो 4 सितंबर को बढ़कर लगभग 17 लाख टन पहुंच गया। खदानों के आसपास की जमीन सूखने के साथ अगले सप्ताह ढुलाई में और तेजी आने की उम्मीद है। इससे ताप बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति बढ़ सकती है।

बिजली की मांग बढ़ी, कोयला उत्पादन घटा

कोयला मंत्रालय और बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जुलाई-अगस्त 2026 में देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर रही, जबकि इसी दौरान कोयला उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर ताप बिजली संयंत्रों के कोयला भंडार पर पड़ा है।

हालांकि, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने अपने उपलब्ध स्टॉक से बिजली क्षेत्र को आपूर्ति जारी रखी। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अगस्त के बीच कंपनी ने 32.29 करोड़ टन कोयला सप्लाई किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 30.26 करोड़ टन के मुकाबले 6.70 प्रतिशत अधिक है।

अगस्त 2026 में कुल कोयला आपूर्ति करीब 6 करोड़ टन रही, जो अगस्त 2025 से 5.50 प्रतिशत अधिक है। वहीं बिजली क्षेत्र को अगस्त में 4.485 करोड़ टन कोयला मिला, जो पिछले साल की तुलना में करीब 4.5 प्रतिशत अधिक है।

इसके विपरीत, सीआईएल का अगस्त 2026 का उत्पादन 5.6 प्रतिशत घटकर 4.75 करोड़ टन रह गया। पिछले वर्ष जुलाई और अगस्त में कोयला उत्पादन में क्रमशः 8 प्रतिशत और 11.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

मानसून में बिजली खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर

बारिश के बावजूद देश में बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जुलाई 2026 में बिजली की खपत करीब 270.30 लाख मेगावाट रही, जो लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। अगस्त में खपत 258.27 लाख मेगावाट तक पहुंची, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 12.85 प्रतिशत अधिक है। मानसून के महीनों में बिजली की यह रिकॉर्ड मांग कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

खदानों में जलभराव से उत्पादन प्रभावित

कोयला मंत्रालय के अनुसार मानसून के कारण कई खदानों में जलभराव हो गया। खदानों को जोड़ने वाली आंतरिक सड़कें क्षतिग्रस्त होने के साथ ही हैंडलिंग प्लांट से कोयला निकालने में भी परेशानी हुई। इन परिस्थितियों के बावजूद सीआईएल ने बिजली क्षेत्र की आपूर्ति को पूरी तरह बाधित नहीं होने दिया।

सरकार के मुताबिक कोल इंडिया की खदानों के पास करीब 7.6 करोड़ टन कोयला स्टॉक उपलब्ध है, जबकि करीब 4.6 करोड़ टन का अतिरिक्त स्टॉक भी तैयार रखा गया है। बारिश और गीलापन कम होने के बाद खदानों से कोयला निकालने तथा उसकी ढुलाई को और तेज किया जा रहा है।

बिजली संयंत्रों को उनकी जरूरत के मुताबिक वार्षिक अनुबंध से अधिक कोयला लेने की भी अनुमति दी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में खदानों की स्थिति सुधरने के साथ ताप बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है।

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