सोशल मीडिया पर किया जा रहा है भ्रामक दावा ;;कानपुर के जुड़वा बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे होने का दावा निकला गलत, आधार अपडेट में गड़बड़ी से हुआ था भ्रम…….

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कानपुर के जुड़वा बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे होने का दावा निकला गलत, आधार अपडेट में गड़बड़ी से हुआ था भ्रम

कानपुर | 29 अक्टूबर 2026

कानपुर के जुड़वा बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे होने का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा में आया था। वायरल पोस्ट में इसे विज्ञान के इतिहास की दुर्लभ घटना बताते हुए दावा किया गया कि दोनों बच्चों के बायोमेट्रिक एक जैसे होने के कारण आधार कार्ड अपडेट कराने में परेशानी हो रही थी। हालांकि, मामले की जांच के बाद सामने आया कि बच्चों के बायोमेट्रिक वास्तव में एक जैसे नहीं थे, बल्कि आधार अपडेट की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी के कारण यह स्थिति बनी थी।

आधार अपडेट के दौरान सामने आई थी समस्या

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र के उस्मानपुर निवासी पवन मिश्रा के जुड़वा बेटे प्रबल और पवित्र का जन्म 10 जनवरी 2015 को हुआ था। दोनों बच्चों के आधार कार्ड बचपन में बनवाए गए थे। बाद में उम्र बढ़ने पर आधार कार्ड में बायोमेट्रिक अपडेट कराने के दौरान समस्या सामने आई।

बताया गया कि एक बच्चे का बायोमेट्रिक अपडेट होने पर दूसरे बच्चे के आधार रिकॉर्ड में परेशानी आने लगी। शुरुआती रिपोर्टों में आशंका जताई गई कि दोनों बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे हैं। इसी दावे के कारण मामला चर्चा में आ गया था।

जांच में सामने आई बायोमेट्रिक मिक्सिंग की गड़बड़ी

12 नवंबर 2025 को प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, आधार सेवा केंद्र में मामले की जांच की गई तो पता चला कि अपडेट के दौरान गलती से एक बच्चे का बायोमेट्रिक दूसरे बच्चे के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया था। इस तरह की स्थिति को बायोमेट्रिक मिक्सिंग कहा जाता है।

जांच के बाद संबंधित बच्चे का बायोमेट्रिक दोबारा लेकर रिकॉर्ड में सुधार किया गया। इस प्रक्रिया से स्पष्ट हुआ कि दोनों बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे होने का दावा वास्तविकता पर आधारित नहीं था।

क्या जुड़वा बच्चों के फिंगरप्रिंट एक जैसे होते हैं?

वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, एक जैसे दिखने वाले या समान DNA वाले जुड़वा बच्चों के फिंगरप्रिंट में काफी समानता हो सकती है, लेकिन उनकी बारीक रेखाओं और संरचना में अंतर होता है। इसलिए केवल चेहरे की समानता या आधार प्रणाली में आई किसी त्रुटि के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि दोनों व्यक्तियों के बायोमेट्रिक बिल्कुल एक जैसे हैं।

कानपुर का यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि सोशल मीडिया पर किसी असाधारण दावे को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। वायरल तस्वीर में किया गया दावा भ्रामक है, क्योंकि जांच में सामने आया था कि समस्या जुड़वा बच्चों के बायोमेट्रिक एक जैसे होने से नहीं, बल्कि आधार अपडेट के दौरान हुई तकनीकी या प्रक्रियागत गड़बड़ी से उत्पन्न हुई थी।

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