महादेवा विधानसभा क्षेत्र पर भी पड़ेगा असर-?, पूर्व मंत्री राम करन आर्य जेल से रिहा होकर बस्ती पहुंचने पर क्या बदलेगा समीकरण…….

Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

जेल से रिहा होकर बस्ती पहुंचे पूर्व मंत्री रामकरन आर्य, सपा कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से किया जोरदार स्वागत

समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व मंत्री रामकरन आर्य के जेल से रिहा होकर बस्ती पहुंचने पर जहां जोरदार स्वागत हुआ वही महादेवा 311 विधानसभा क्षेत्र का समीकरण भी काफी कुछ उनके आने से अब बदल सकता है.

बस्ती 28 अक्टूबर 2026

बस्ती के चर्चित शंभूशरण पाल हत्याकांड में सजा काटने के बाद पूर्व मंत्री एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामकरन आर्य जेल से रिहा होकर मंगलवार को बस्ती पहुंचे। उनके जिले में पहुंचने पर समाजवादी पार्टी के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर कलवारी-टांडा पुल के पास जिले की सीमा पर बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद रास्ते में भी कई स्थानों पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। करीब तीन दशक पुराने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा को 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदले जाने के बाद उनकी रिहाई हुई है।

कलवारी-टांडा पुल पर जुटे सपा कार्यकर्ता

रामकरन आर्य के बस्ती लौटने की सूचना मिलने के बाद मंगलवार सुबह से ही उनके समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। सपा जिलाध्यक्ष एवं सदर विधायक महेंद्र नाथ यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिले की सीमा पर उनका स्वागत किया। बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी के बीच फूल-मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया।

इसके बाद चमनगंज, कलवारी और कुसौरा समेत रास्ते में कई स्थानों पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। लंबे समय बाद अपने गृह जनपद पहुंचे रामकरन आर्य के स्वागत में समर्थकों की भीड़ जुटी। स्वागत कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला।

हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को 10 साल में बदला

रामकरन आर्य को वर्ष 1994 में हुए शंभूशरण पाल हत्याकांड में बस्ती की सत्र अदालत ने 10 अप्रैल 2017 को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

16 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील पर फैसला सुनाते हुए हत्या की धारा 302 के तहत दी गई उम्रकैद की सजा को गैर इरादतन हत्या की धारा 304 के भाग-एक के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। अदालत ने जुर्माने को बरकरार रखा। इसी मामले में अन्य आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील भी खारिज कर दी गई।

23 नवंबर 1994 को जीपों की टक्कर के बाद हुई थी हत्या

शंभूशरण पाल हत्याकांड की घटना 23 नवंबर 1994 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शंभूशरण पाल अपने परिचितों के साथ जीप से वाल्टरगंज में आयोजित किसान रैली में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में आवास विकास चौराहे के पास उनकी जीप की टक्कर तत्कालीन विधायक रामकरन आर्य की जीप से हो गई।

इस टक्कर के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। आरोप था कि कहासुनी के दौरान रामकरन आर्य ने बंदूक से शंभूशरण पाल को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2017 में सत्र अदालत ने रामकरन आर्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

सजा में बदलाव के बाद जेल से हुई रिहाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए घटना को पूर्व नियोजित हत्या के बजाय अचानक हुए विवाद के दौरान आवेश में किया गया कृत्य माना। इसी आधार पर दोषसिद्धि और सजा में बदलाव किया गया।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद जेल में बिताई गई अवधि और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर रामकरन आर्य रिहा होकर बस्ती लौट आए। उनके आगमन पर समर्थकों ने जगह-जगह स्वागत किया। इस घटनाक्रम के साथ ही शंभूशरण पाल हत्याकांड एक बार फिर बस्ती की राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

📍 देखना यह है कि रामकरन आर्य के आने के बाद महादेवा 311 विधानसभा क्षेत्र का समीकरण किस करवट बैठता है,.

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