सीएमएस पर उत्पीड़न का आरोप-स्टाफ नर्स ने डीएम से किया शिकायत……

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जिला महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स ने सीएमएस पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, डीएम से की शिकायत

बस्ती, 07 फरवरी 2026.
जिला महिला अस्पताल बस्ती में कार्यरत एक स्टाफ नर्स ने अस्पताल के सीएमएस पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। लगातार हो रही कथित प्रताड़ना से आहत स्टाफ नर्स इस बार जिलाधिकारी की चौखट पर पहुंची और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

स्टाफ नर्स का आरोप है कि सीएमएस और कुछ वरिष्ठ अधिकारी उनके खिलाफ झूठी शिकायतें कर लगातार दबाव बना रहे हैं। ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनसे बार-बार स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है, जबकि वह निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित रूप से ड्यूटी कर रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि बीते नौ महीनों से जानबूझकर उनकी ड्यूटी बार-बार बदली जा रही है, ताकि मानसिक रूप से परेशान किया जा सके।

पीड़ित स्टाफ नर्स संविदा पर एसएनसीयू वार्ड में तैनात हैं। आरोप है कि पहले उन्हें वहां से हटाकर केएमसी वार्ड में भेजा गया, जहां अन्य स्टाफ नर्सों के मुकाबले अधिक समय तक ड्यूटी करने का रोस्टर जारी किया गया। इसके बावजूद उन्होंने ड्यूटी निभाई। बाद में अलग-अलग वार्डों में ड्यूटी के नाम पर उन्हें इधर-उधर भेजा जाता रहा और रोस्टर के अनुरूप काम करने के बावजूद प्रताड़ित किया गया। कुछ समय बाद फिर से एसएनसीयू वार्ड में उनकी तैनाती कर दी गई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि ड्यूटी बदलवाने के लिए उन्होंने संबंधित सीनियर से अनुमति लेकर आपसी सहमति से बदलाव किया था। इसी तरह तीन अन्य स्टाफ नर्सों ने भी ड्यूटी बदली, लेकिन नोटिस केवल उन्हें ही दिया गया। स्टाफ नर्स ने मांग की है कि ड्यूटी के दौरान की सीसीटीवी फुटेज निकलवाकर जांच कराई जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वह रोस्टर के अनुसार ही कार्य कर रही थीं।

इस मामले से पहले भी जिला महिला अस्पताल में विवाद सामने आ चुका है। कुछ माह पूर्व एक चिकित्सक और सीएमएस के बीच हाथापाई की घटना हुई थी, जो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। उस समय चर्चा थी कि इसी स्टाफ नर्स से जुड़े प्रकरण को लेकर विवाद बढ़ा था। बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप से मामला शांत कराया गया था और एडी हेल्थ स्तर से जांच भी कराई गई थी।

वहीं, आरोपों पर सफाई देते हुए सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने कहा है कि ड्यूटी में लापरवाही को लेकर स्टाफ नर्स से स्पष्टीकरण मांगा गया था। कार्यालय में आकर जवाब देने के बजाय वह बहस करने लगीं। पूरे प्रकरण को जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया है | स्टाफ नर्स द्वारा लगाया गया उत्पीड़न का आरोप निराधार है।

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👉 फोटो -सांकेतिक

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