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चादर बदलते समय अचानक धंस गया कमरे का फर्श, पलंग समेत 16 फीट गहरे गड्ढे में गिरी महिला, सामने आया सिंधिया रियासत का 100 साल पुराना रहस्य
भिंड (मध्य प्रदेश), 06 नवंबर 2026.
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक ऐसा हैरान कर देने वाला हादसा सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। घर के कमरे में पलंग की चादर बदल रही 45 वर्षीय महिला अचानक पलंग समेत करीब 15 से 16 फीट गहरे जमीन के नीचे बने गड्ढे में जा गिरी। महिला कुछ समझ पाती, इससे पहले ही कमरे का फर्श भरभराकर नीचे धंस गया। अचानक हुए इस हादसे से परिवार में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि परिजनों और पड़ोसियों की मदद से महिला को सीढ़ी के सहारे बाहर निकाल लिया गया। घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
रात करीब 9:15 बजे हुआ हादसा, पलंग समेत जमीन में समा गई महिला
मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना भिंड शहर के गर्ल्स स्कूल वाली गली की है। बुधवार रात करीब 9 बजकर 15 मिनट पर 45 वर्षीय निशि मिश्रा अपने घर के कमरे में पलंग की चादर बदल रही थीं। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ कमरे का फर्श धंस गया और देखते ही देखते वहां गहरा गड्ढा बन गया।
महिला पलंग समेत करीब 15 से 16 फीट नीचे जा गिरीं। हादसे के समय परिवार के अधिकांश सदस्य एक निमंत्रण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए घर से बाहर गए हुए थे। जब परिजन वापस लौटे तो कमरे में फर्श की जगह गहरा गड्ढा देखकर उनके होश उड़ गए। महिला को अंदर फंसा देखकर तत्काल बचाव कार्य शुरू किया गया।
सीढ़ी की मदद से महिला को निकाला गया बाहर
परिवार के छोटे भाई अनूप मिश्रा और आसपास के लोगों ने मिलकर गड्ढे में सीढ़ी उतारी। काफी मशक्कत के बाद महिला को बाहर निकाला गया। हादसे में उन्हें चोटें आईं, जिसके बाद तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महिला की हालत फिलहाल स्थिर है।
मकान के नीचे मिला सिंधिया रियासत के समय का पुराना तहखाना
इस हादसे का सबसे चौंकाने वाला पहलू मकान के नीचे मौजूद ऐतिहासिक संरचना है। परिवार के मकान मालिक पंडित अनुराग मिश्रा के अनुसार, उनके परदादा पंडित मदन मोहन मिश्रा सिंधिया रियासत के समय मानद मजिस्ट्रेट थे। वे वनखंडेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी संभालते थे।
बताया गया है कि उस दौर में इसी स्थान पर प्रशासनिक कचहरी लगती थी। आसपास के क्षेत्रों से कर (टैक्स) के रूप में वसूले जाने वाले अनाज को सुरक्षित रखने के लिए जमीन के नीचे एक बड़ी भूमिगत संरचना बनाई गई थी। स्थानीय भाषा में इसे गल्ला खंती कहा जाता था।
इसी पुराने कक्ष के ऊपर बाद में मकान का निर्माण कर दिया गया। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर महिला गिरीं, वह उसी ऐतिहासिक अनाज भंडारण वाली संरचना का हिस्सा था।
वर्ष 1980 में कराया गया था मकान का पुनर्निर्माण
परिवार के मुताबिक, वर्ष 1980 में उनके पिता और चाचा ने पुराने मकान का पुनर्निर्माण कराया था। उस दौरान जमीन के नीचे मौजूद पुरानी अनाज खंती को मिट्टी भरकर बंद कर दिया गया था।
परिवार का प्रारंभिक अनुमान है कि लंबे समय से जमीन के भीतर पानी का रिसाव होने के कारण खंती में भरी मिट्टी धीरे-धीरे बहती रही। इससे जमीन के नीचे खाली स्थान बनता चला गया। समय के साथ ऊपरी हिस्से का फर्श कमजोर हो गया और बुधवार रात दबाव पड़ने से अचानक ढह गया।
बताया गया है कि गड्ढे के निचले हिस्से में पानी भी मौजूद था। हालांकि, फर्श धंसने के वास्तविक कारण की आधिकारिक तकनीकी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पुराने मकानों की सुरक्षा पर उठे सवाल
भिंड की इस घटना ने पुराने शहरों में बने मकानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई पुराने भवनों के नीचे कुएं, तहखाने, अनाज भंडारण स्थल और अन्य भूमिगत संरचनाएं मौजूद हो सकती हैं। समय के साथ इनमें पानी का रिसाव अथवा मिट्टी का कटाव होने से ऊपर बने निर्माण कमजोर पड़ सकते हैं।
इसलिए ऐसे पुराने भवनों की तकनीकी जांच और भूमिगत संरचनाओं की स्थिति का पता लगाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल राहत की बात यह है कि करीब 16 फीट गहरे गड्ढे में पलंग समेत गिरने के बावजूद महिला को समय रहते बाहर निकाल लिया गया और उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
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