
Gyan Prakash Dubey
मुताह निकाह के आड़ में लड़कियों का हो रहा शोषण
👉हैदराबाद में ‘मुताह निकाह’ का खौफनाक सच: एक रिवायत या व्यापार?
👉लड़कियों की जिंदगी को नर्क बना रही है यह प्रथा
हैदराबाद में मुताह निकाह की प्रथा ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह एक ऐसा अस्थायी निकाह है, जिसमें अरब देशों और अन्य खाड़ी मुल्कों के अमीर शेख मोटी रकम देकर गरीब परिवारों की नाबालिग लड़कियों से निकाह करते हैं। कुछ दिन उनके साथ समय बिताने के बाद उन्हें छोड़कर चले जाते हैं। यह निकाह, जो इस्लामी नियमों का सहारा लेकर कराया जाता है, असल में एक व्यवस्थित कारोबार बन चुका है।
रिपोर्ट से खुलासा
हाल ही में आजतक की रिपोर्टर मृदुलिका झा ने इस मामले पर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हैदराबाद के शाहीन नगर, हसन नगर, बारकास, चारमीनार जैसे इलाकों में इस गंदे खेल को बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जा रहा है। ब्रोकर और एजेंट इन निकाहों को कराने के लिए सक्रिय हैं। ये एजेंट गरीब परिवारों को पैसे का लालच देकर लड़कियों का सौदा करते हैं।
एक पीड़ित की दर्दनाक कहानी
शबाना (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की की आपबीती किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देगी। जब उसे पहला पीरियड आया, उसी समय उसका निकाह एक अरब शेख से कर दिया गया। शेख उसे 15 दिनों के लिए होटल में लेकर गया, जहाँ उसका शोषण हुआ। वापस लौटने पर वह गर्भवती थी। परिवार ने गर्भ गिराने की कोशिश की, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। आज, शबाना अपनी बच्ची को अपनी बेटी कहने तक का हक नहीं रखती।
इस ‘धंधे’ का नेटवर्क
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ब्रोकर 20,000 से 50,000 रुपये में लड़कियों का सौदा करते हैं। शेख लड़कियों की तस्वीरें और जानकारी व्हाट्सऐप के जरिए मांगते हैं। लड़कियों को वर्जिन दिखाने के लिए सर्जरी तक कराई जाती है। कई मामलों में इन लड़कियों को विदेश भेजकर उनके साथ गुलामों जैसा व्यवहार किया जाता है।
मुताह निकाह के खतरनाक नियम
इस्लामिक परंपरा के अनुसार, मुताह निकाह एक अस्थायी विवाह है। इसमें:
- लड़कियों की उम्र 15 साल से अधिक होनी चाहिए।
- बीवियों की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।
- निकाहनामे में दहेज और अवधि का जिक्र होता है।
- तलाक का कोई प्रावधान नहीं है।
- महिला भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।
सरकार और समाज की चुप्पी
हालाँकि, यह रिवायत सालों से जारी है, लेकिन न ही स्थानीय प्रशासन और न ही समाज इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठा रहा है। कई परिवार अपनी माली हालत सुधारने के लिए अपनी बेटियों का इस तरह सौदा करने में भी नहीं हिचकिचाते।
क्या किया जा सकता है?
यह मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी है। इस गंदे धंधे को रोकने के लिए:
कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
एजेंटों और ब्रोकरों पर शिकंजा कसना होगा।
समाज में जागरूकता लाकर लोगों को इस तरह के शोषण के खिलाफ खड़ा करना होगा।
गरीब परिवारों को आर्थिक मदद देकर इस तरह के समझौते करने से रोका जा सकता है।


लेख साभार .आज तक
