इतनी बड़ी सुरंग जिससे गुजर रही थी ट्रैकें : तस्करों ने बॉर्डर पर बनाई सुरंग अधिकारी भी रह गए हैरान

बॉर्डर पर ड्रग तस्करों का नया पैंतरा, सुरंग के जरिए ट्रक क्रॉस, DRI ने पकड़ी बड़ी खेप

नई दिल्ली 23 जनवरी 25.
बॉर्डर पर सख्ती के बावजूद ड्रग तस्करी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। इस बार तस्करों ने चौंकाने वाला तरीका अपनाया। उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सुरंग बनाई, जो इतनी बड़ी थी कि ट्रक भी उसमें से गुजर सकता था। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने असम और त्रिपुरा में बड़ी कार्रवाई करते हुए 32 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट्स जब्त की हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 32 करोड़ रुपये है। इस दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सुरंग के जरिए ट्रक से लाई गई ड्रग्स 19 जनवरी को DRI ने असम के कछार जिले के द्वारबंद बाजार क्षेत्र में 26 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट्स बरामद कीं। ये ड्रग्स मिजोरम के जरिए भारत-म्यांमार सीमा से तस्करी कर लाई गई थीं। इस ऑपरेशन में असम राइफल्स (सिलचर) ने अहम भूमिका निभाई। एक विशेष रूप से निर्मित गुफा में छिपाकर इन ड्रग्स को अशोक लीलैंड ट्रक के जरिए ले जाया जा रहा था। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

अगरतला में दूसरी बड़ी बरामदगी 20 जनवरी को DRI ने त्रिपुरा के अगरतला के बाहरी इलाके में एक ट्रक से 6 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट्स बरामद कीं। इन्हें ट्रक के डैशबोर्ड के नीचे छिपाया गया था। इसकी कीमत करीब 6 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

DRI की बड़ी उपलब्धि मौजूदा वित्तीय वर्ष में DRI ने पूर्वोत्तर में ड्रग तस्करी के 36 मामले दर्ज किए हैं और 70 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 7 महिलाएं शामिल हैं। अब तक 231 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट्स, 16 किलो हेरोइन, 1,375 किलो गांजा और 3.7 किलो हाइड्रोपोनिक वीड समेत कुल 355 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग्स जब्त की जा चुकी हैं।

नई प्रवृत्तियां और चुनौतियां हाइड्रोपोनिक वीड की तस्करी अब हवाई यात्रियों के जरिए भी की जा रही है। यह एक प्रकार की मारिजुआना है, जो मिट्टी के बजाय पोषक तत्वों से भरपूर पानी में उगाई जाती है। बयान के अनुसार, अवैध ड्रग्स के परिवहन में इस्तेमाल किए गए 32 वाहनों को भी जब्त किया गया है।

इस तरह की कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि तस्कर कानून को चकमा देने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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