
नई दिल्ली, 12 मई 2025 – ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने ‘सीजफायर’ शब्द के इस्तेमाल से क्यों किया परहेज?
भारत और पाकिस्तान के बीच 12 मई को हुई सैन्य गतिविधियों को रोकने की सहमति को लेकर एक नई कूटनीतिक बहस शुरू हो गई है। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते को ‘सीजफायर’ नहीं मानता, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर अब भी पूरी ताकत के साथ जारी है।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए भयावह आतंकी हमले में 34 भारतीय सुरक्षाबलों की शहादत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। यह अभियान सीमापार आतंकवाद के खिलाफ भारत की अब तक की सबसे आक्रामक जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन पाकिस्तान की सीमा में घुसकर उन आतंकी शिविरों को निशाना बना रहा है जो सीधे तौर पर हमले से जुड़े रहे हैं।
सरकारी सूत्रों ने ‘आजतक’ को बताया कि 12 मई को जो आपसी सहमति बनी, वह केवल जमीनी, हवाई और समुद्री मोर्चों पर आमने-सामने की गोलीबारी रोकने के लिए है। इसका उद्देश्य एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सैनिकों के बीच सीधा टकराव टालना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को रोका है।
‘सीजफायर’ शब्द से दूरी
भारत सरकार का स्पष्ट मत है कि ‘सीजफायर’ शब्द का प्रयोग केवल तब किया जाना चाहिए जब दोनों पक्ष न केवल गोलीबारी रोकने पर सहमत हों, बल्कि किसी भी प्रकार के सैन्य अभियान को भी तत्काल प्रभाव से बंद करें। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर एक निरंतर चलने वाली आंतरिक-सुरक्षा आधारित रणनीतिक कार्रवाई है, जो भारत के सैन्य नियंत्रण में है।
सूत्रों का कहना है, “हम सीजफायर शब्द से इसलिए परहेज कर रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान ने अतीत में बार-बार इसका उल्लंघन किया है। हम एक ‘न्यू नॉर्मल’ की स्थिति में हैं, जहां हम अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई को प्राथमिकता देंगे।”
पाकिस्तान की फायरिंग और अविश्वास का माहौल
हालांकि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सहमति बनी कि शाम पांच बजे के बाद गोलीबारी रोकी जाएगी, लेकिन कुछ ही घंटों में पाकिस्तान ने एलओसी के पास फिर से गोलाबारी की। यह न केवल सहमति का उल्लंघन था, बल्कि भारत की आशंकाओं को भी सही साबित करता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिका की भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सहमति को “फुल एंड इम्मीडियेट सीजफायर” करार दिया, जिससे भारत सरकार असहज दिखी। दरअसल, भारत नहीं चाहता कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह धारणा बने कि उसने ऑपरेशन सिंदूर बंद कर दिया है या पीछे हट गया है। भारत का उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक संदेश देना है — न कि केवल कागजी समझौते करना।
विश्लेषण
भारत द्वारा ‘सीजफायर’ शब्द से दूरी बनाकर रखना एक रणनीतिक और सैद्धांतिक फैसला है। यह न केवल पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखता है, बल्कि देशवासियों को यह संकेत भी देता है कि शहीदों की कुर्बानी का बदला अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर अब केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बन चुका है।
NGV PRAKASH NEWS

