“कोविड के साए में हैवानियत: डॉक्टर ने साथी को महिला मरीज को मार डालने का दिया था आदेश!”
नई दिल्ली।
देश एक बार फिर कोरोना संक्रमण की नई लहर की चपेट में है, मगर इसी बीच एक ऐसा शर्मनाक मामला सामने आया है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। महाराष्ट्र के लातूर में कोविड महामारी के सबसे भीषण दौर के दौरान, एक सरकारी डॉक्टर ने अपने ही सहयोगी को महिला मरीज की हत्या का आदेश दिया था। अब इस घटना से जुड़ा ऑडियो वायरल हो चुका है, जिसने पीड़ित परिवार की टीस को और बढ़ा दिया है।
कोविड के काले दिनों की कहानी
यह मामला 2021 का है, जब अस्पतालों में ऑक्सीजन और दवाओं की किल्लत से लोग दम तोड़ रहे थे। उसी दौरान, लातूर के सरकारी अस्पताल में भर्ती थीं कौसर फातिमा, जो कोरोना संक्रमित थीं। इसी अस्पताल में तैनात थे अतिरिक्त जिला सर्जन डॉक्टर शशिकांत देशपांडे। वायरल हुए ऑडियो के अनुसार, डॉक्टर देशपांडे ने अपने सहयोगी डॉक्टर शशिकांत डांगे को फोन पर आदेश दिया— “उस महिला को मार डालो।”
ऑडियो से खुली हैवानियत की पोल
डॉ. डांगे ने बताया कि इस बातचीत में जातिसूचक गालियों का भी इस्तेमाल हुआ। ऑडियो में साफ सुना जा सकता है कि डॉक्टर देशपांडे महिला मरीज के प्रति गुस्से से भरे थे और उसके “जीवित” रहने को लेकर नाराज थे। डॉ. डांगे ने अपनी मजबूरी जताते हुए बताया कि उस समय वे चुप रहे क्योंकि उनकी पत्नी भी उसी अस्पताल में भर्ती थीं।
मौत नहीं, नई जिंदगी मिली
डरावना आदेश मिलने के बावजूद, किस्मत ने कौसर फातिमा का साथ दिया। कुछ ही हफ्तों में वे ठीक होकर अपने घर लौट आईं। मगर, इस ऑडियो के वायरल होने के बाद कौसर के परिवार का दर्द फिर से ताजा हो गया। कौसर के पति ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है।
पुलिस ने दर्ज किया केस
पुलिस ने डॉक्टर देशपांडे के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी है। वहीं, डॉक्टर डांगे से भी पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। सवाल उठ रहा है कि महामारी के दौर में, जब डॉक्टरों को “फरिश्ता” कहा जा रहा था, तब कुछ लोग हैवान बन बैठे थे।
अब समाज यही पूछ रहा है— “क्या वाकई कोरोना ने इंसानियत को भी निगल लिया था?”
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