निलंबित एएसआई के घर मिला हथियारों का जखीरा: एसटीएफ से मुठभेड़ के बाद किया सरेंन्डर

AK-47, गोलियों का जखीरा और मोहरों की फैक्ट्री: समस्तीपुर में गूंजे गोलियों के धमाके, निलंबित ASI सरोज सिंह का काला सच उजागर

समस्तीपुर | 6 जून 2025 | विशेष रिपोर्ट — NGV PRAKASH NEWS

बिहार की पुलिस महकमे से एक ऐसा काला चेहरा सामने आया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस का वो वर्दीधारी, जिसे कानून की रक्षा करनी थी, वही अब हथियारों के काले कारोबार का केंद्र बन गया। समस्तीपुर के सुल्तानपुर गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब STF और जिला पुलिस की टीम ने निलंबित ASI सरोज सिंह के घर पर छापेमारी की और जवाब में ताबड़तोड़ गोलियां बरसती चली गईं।

यह कोई फिल्मी सीन नहीं था, बल्कि हकीकत का ऐसा चेहरा था जहां एक सरकारी अफसर का घर हथियारों का अड्डा निकला।
छापेमारी के दौरान घर के भीतर से हुई फायरिंग ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। AK-47 से लेकर भारी मात्रा में कारतूस, सरकारी मोहरें और संदिग्ध दस्तावेज बरामद होने की पुष्टि हुई है।


🔥 ऑपरेशन सरोज सिंह: एक्शन, गोलियां और गिरफ्तारी

सूत्रों के अनुसार STF को गुप्त सूचना मिली थी कि निलंबित ASI सरोज सिंह, जो पहले अपने इलाके में दबंग पुलिस अफसर माने जाते थे, अपने घर में अवैध हथियारों का जखीरा छुपाकर रखे हैं। पहले भी उन पर विभागीय गड़बड़ियों के आरोप थे, जिसके चलते उन्हें निलंबित किया गया था।

6 जून की सुबह, STF ने जब सुल्तानपुर गांव स्थित उनके आवास पर दस्तक दी, तो जवाब में भीतर से गोलियों की बौछार शुरू हो गई। पुलिस ने भी तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। करीब 10 मिनट तक चली गोलीबारी के बाद सरोज सिंह ने घुटने टेक दिए और STF के सामने आत्मसमर्पण कर दिया


🧨 क्या मिला पुलिस को?

  • एक AK-47 राइफल
  • बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस
  • कई प्रकार के सरकारी विभागों की नकली मोहरें
  • कुछ संभावित फर्जी दस्तावेज
  • अवैध गतिविधियों से जुड़े डिजिटल सबूत

बताया जा रहा है कि सरोज सिंह के पटना स्थित ठिकाने पर भी छापेमारी की गई है, जहां से कुछ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।


🧩 कहानी की परतें अभी खुलनी बाकी हैं…

सरोज सिंह सिर्फ एक निलंबित पुलिस अफसर नहीं, बल्कि संभवतः एक बड़ी आपराधिक साजिश का हिस्सा हैं, जिसमें अवैध हथियारों की तस्करी से लेकर सरकारी मोहरों का दुरुपयोग शामिल हो सकता है। STF की टीम अब सभी साक्ष्यों को खंगाल रही है और जांच के दायरे में कई अन्य नाम भी आ सकते हैं।


✍️ NGV PRAKASH NEWS की टिप्पणी:

जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सबसे बड़ा खतरा कानून पर ही मंडराने लगता है। समस्तीपुर की यह घटना एक चेतावनी है कि सिस्टम में बैठे काले चेहरों की समय रहते पहचान और कार्रवाई ज़रूरी है। सरोज सिंह का गिरना महज़ एक शुरुआत है |

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