शर्मनाक : बुजुर्ग का हाथ पैर बांध कार में बंद किया और खुद चले गए…… देखने

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ताजमहल पार्किंग में बुजुर्ग को कपड़ों से बांधकर कार में बंद किया, गर्मी में हालत नाजुक — महाराष्ट्र से आया था परिवार

आगरा, 17 जुलाई 2025।
ताजमहल जैसी ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाली जगह से एक दिल दहला देने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है। यहां पश्चिमी गेट पार्किंग में एक कार के अंदर एक बुजुर्ग व्यक्ति बेहोशी की हालत में बंधे मिले। उन्हें कथित तौर पर भीषण गर्मी और उमस में घंटों तक कपड़ों से बांधकर कार में बंद रखा गया, जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

संदिग्ध कार से हुआ खुलासा

घटना का खुलासा उस समय हुआ जब पार्किंग में ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड को एक कार संदिग्ध हालत में खड़ी दिखी। उसने कार के अंदर झांककर देखा तो एक बुजुर्ग व्यक्ति बेहोश हालत में दिखाई दिए, उनके हाथ-पैर कपड़ों से बंधे हुए थे। तुरंत अन्य कर्मचारियों की मदद लेकर गार्ड ने कार का शीशा तोड़ा और बुजुर्ग को बाहर निकाला।

गर्मी में हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

बुजुर्ग को बाहर लाकर पानी पिलाया गया, लेकिन वह कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। हालत बेहद नाजुक देख एम्बुलेंस बुलाई गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर अवस्था में भर्ती कर लिया है।

प्रत्यक्षदर्शी बोले: ‘अमानवीयता की हद’

घटना के प्रत्यक्षदर्शी और स्थानीय टूरिस्ट गाइड मोहम्मद असलम ने बताया कि,

“कार में बुजुर्ग व्यक्ति बिल्कुल बेसुध थे, उनके हाथ-पैर बंधे थे और गर्मी से हालत चिंताजनक हो गई थी। यह इंसानियत को शर्मसार करने वाला दृश्य था।”

महाराष्ट्र से आया था परिवार?

गाड़ी पर महाराष्ट्र की नंबर प्लेट थी और उस पर ‘महाराष्ट्र शासन’ का स्टिकर भी चिपका था। कार की छत पर बंधा परिवार का सामान देखकर आशंका जताई जा रही है कि कोई परिवार महाराष्ट्र से आगरा घूमने आया था और संभवतः किसी निजी कारण से इस बुजुर्ग को कार में बंद कर ताजमहल देखने चला गया।

पुलिस कर रही जांच

इंस्पेक्टर कुंवर सिंह ने पुष्टि करते हुए कहा कि—

“यह मामला प्रथम दृष्टया लापरवाही या असंवेदनशीलता का प्रतीत होता है। कार और उसके मालिक की पहचान की जा रही है और सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।”

पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, पार्किंग रिकॉर्ड और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बुजुर्ग को इस हाल में छोड़ने के पीछे मकसद क्या था — यह केवल उपेक्षा थी या इसके पीछे कुछ और गंभीर सच्चाई छिपी है।

सवाल उठाता है समाज पर

यह घटना न सिर्फ परिवार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज भी बुजुर्गों के साथ ऐसा व्यवहार समाज में चुपचाप सहा जा रहा है? भीषण गर्मी में एक इंसान को इस हाल में छोड़ देना न केवल अमानवीय अपराध है बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय।

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