नगर निगम नें शहर को ऐसा चमकाया की उसे नाले भी नहीं दिखाई दिए : वह तो उस बुजुर्ग नें..

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लखनऊ देश का तीसरा सबसे साफ शहर घोषित, लेकिन नाले ने खोली ‘साफ-सफाई’ की पोल
— चमकती सड़कों के नीचे बहता सिस्टम, बुजुर्ग की स्कूटी समेत फिसलकर कर दी पोल खोल

लखनऊ।
देशभर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट आते ही राजधानी लखनऊ ने एक बार फिर नाम रोशन कर दिया — देश का तीसरा सबसे साफ शहर। मगर शुक्रवार रात चौक इलाके में जो हुआ, उसने इस रैंकिंग की चमक पर गंदे नाले का छींटा मार दिया।

एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी स्कूटी से घर की ओर लौट रहे थे, तभी अचानक स्कूटी समेत खुले नाले में जा गिरे। न नाले का कोई संकेत था, न कोई बैरिकेडिंग। लोगों को तो पहले लगा कि कोई हादसा हुआ ही नहीं, क्योंकि नाला ऐसा “साफ-सुथरा” था कि दिखा ही नहीं।

“नाले में समा गया जैसे जिम्मेदारी से प्रशासन”

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुजुर्ग का संतुलन बिगड़ते ही वे सीधे नाले में समा गए। राहत की बात ये रही कि बुजुर्ग को स्थानीय लोगों ने समय रहते बाहर निकाल लिया। हालांकि स्कूटी की किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी — वो घंटों तक नाले में पड़ी रही।

स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा, “नगर निगम को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने सफाई के इतने ऊंचे मानकों पर काम किया कि नाले अब आंखों से ओझल हो चुके हैं। शहर तो चमक रहा है, बस नाले चालाक हो गए हैं — दिखते नहीं, सीधे ले जाते हैं।

‘ऊपर चमकता शहर, नीचे बहता सिस्टम’

लखनऊ की रैंकिंग पर सवाल नहीं है — कागज़ों में और ड्रोन कैमरों की नज़रों में शहर साफ है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कई इलाकों में खुले या अधूरे ढंके नाले, टूटी पटरी, और अंधेरी गलियां अब भी जानलेवा बनी हुई हैं।

चौक, अमीनाबाद, ठाकुरगंज जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में अक्सर सड़क किनारे ऐसे नाले मिल जाते हैं जिन पर या तो ढक्कन ही नहीं या फिर गंदगी से छिपे होते हैं। इन्हीं में एक ने शुक्रवार को एक बुजुर्ग को अपना “साफ-सुथरा” रास्ता दिखा दिया।

प्रशासन मौन, जनता व्यंग्य में बोलती

हादसे के बाद नगर निगम की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। न कोई मुआवज़े की घोषणा, न जांच का आदेश। चौक क्षेत्र के पार्षद से बात करने पर उन्होंने कहा कि “जल्द ही उस नाले को ढकने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।”

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है, “प्रस्ताव नहीं, फाल्ट कवर चाहिए। सिस्टम चमकता दिखाना काफी नहीं, ज़मीन पर सुरक्षित बनाना ज़रूरी है।”

इस घटना ने यह जरूर साबित कर दिया कि लखनऊ की चमकदार रैंकिंग के नीचे एक ऐसा सिस्टम बहता है, जो दिखता कम है और ले डूबता ज्यादा है।

NGV PRAKASH NEWS

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