

रांची से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ झकझोर कर रख दिया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि प्राइवेट अस्पताल किस हद तक लूट और मनमानी पर उतर आए हैं। आरोप है कि यहां एक प्राइवेट अस्पताल ने नवजात शिशु की मौत को कई दिनों तक छुपाकर उसके शव को वेंटिलेटर पर ही रखे रखा। जब तक बच्चे का शव परिवार को सौंपा गया, तब तक वह फूल चुका था और उसमें से दुर्गंध आने लगी थी।
गरीब परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
मृतक नवजात के पिता मुकेश सिंह, जो रांची में ऑटो रिक्शा चलाते हैं, ने बताया कि उनका बच्चा 4 जुलाई को रांची सदर अस्पताल में पैदा हुआ था। 8 जुलाई को ऑक्सीजन की कमी के कारण उसे लिटिल हार्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार ने इलाज के लिए करीब 3 लाख रुपये उधार लिए।
लेकिन परिवार को बच्चे के पास 10 मिनट बैठने तक की अनुमति नहीं दी गई। जब-जब उन्होंने बच्चे को देखने की मांग की, अस्पताल उन्हें पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो भेजता रहा। 12 जुलाई को भेजा गया वीडियो बाद में बार-बार वही वीडियो के रूप में भेजा जाने लगा, जिससे पिता को शक हुआ कि कहीं बच्चा मर तो नहीं गया। आखिरकार 30 जुलाई को अस्पताल ने बच्चे का शव सौंपा, जो कई दिनों से मृत था।
शव से आने लगी दुर्गंध
जांच में सामने आया कि शव को इतने दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया कि वह सड़ने लगा। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। पुलिस ने भी अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
अस्पताल ने आरोपों को नकारा
वहीं, लिटिल हार्ट अस्पताल ने सभी आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल के डॉक्टर सत्यजीत कुमार का कहना है कि बच्चे को 8 जुलाई को ही गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। वह सेप्टिक शॉक में था और उसकी सांसें अनियमित थीं। अस्पताल का दावा है कि शव को वेंटिलेटर पर रखने का आरोप गलत है।
लेकिन सवाल ये है कि जब गरीब परिवार ने लाखों रुपये खर्च कर दिए, तब भी उन्हें अपने बच्चे की हालत तक जानने का हक क्यों नहीं मिला? और अगर बच्चा कई दिनों पहले ही मर चुका था, तो परिवार को अंधेरे में क्यों रखा गया?
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि प्राइवेट अस्पतालों की लूट और संवेदनहीनता किस हद तक जा चुकी है। गरीब परिवार न केवल अपने बच्चे से हाथ धो बैठा, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी तबाह हो गया।
: NGV PRAKASH NEWS
स्रोत.. ABP LIVE
