सहारा ग्रुप पर ई डी का बड़ा एक्शन; क्या वापस होगा निवेशकों का पैसा..

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सहारा ग्रुप पर ईडी का बड़ा एक्शन, 1.74 लाख करोड़ रुपये के घोटाले में चार्जशीट दाखिल

नई दिल्ली | 06 सितंबर 2025

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सहारा इंडिया ग्रुप के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता की विशेष PMLA कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला निवेशकों को “हाई रिटर्न” और “सुरक्षित बचत” का झांसा देकर 1.74 लाख करोड़ रुपये ठगने से जुड़ा है। चार्जशीट में सहारा के संस्थापक सुब्रतो रॉय की पत्नी सपना रॉय, बेटा सुशांतो रॉय, जेपी वर्मा और अनिल अब्राहम समेत कई अधिकारियों को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

‘भरोसेमंद छवि’ में फंसे करोड़ों निवेशक

ईडी की जांच में सामने आया कि सहारा इंडिया लंबे समय तक आम जनता के बीच “सुरक्षित निवेश” का चेहरा बना रहा। गांव-गांव तक फैले एजेंट और सुब्रतो रॉय की भरोसेमंद छवि ने करोड़ों लोगों को सहारा की स्कीमों में पैसा लगाने को प्रेरित किया। लोगों ने बेटी की शादी, घर बनाने और बुढ़ापे की सुरक्षा जैसे सपनों के लिए अपनी गाढ़ी कमाई सहारा में निवेश की। लेकिन तय समय आने के बावजूद पैसा लौटाया ही नहीं गया।

भगोड़ा बेटा, गिरफ्तारी वारंट की तैयारी

चार्जशीट में सबसे बड़ा खुलासा सुब्रतो रॉय के बेटे सुशांतो रॉय को लेकर हुआ है। ईडी का कहना है कि वह पूछताछ से बच रहा है और भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। एजेंसी अब कोर्ट से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कराने की प्रक्रिया में है। यह तथ्य बताता है कि सहारा घोटाले की लड़ाई अभी भी खत्म नहीं हुई है।

गरीब और मध्यमवर्गीय बने सबसे बड़े शिकार

सहारा का सबसे बड़ा शिकार वो लोग बने जिनके पास बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच आसान नहीं थी। छोटे कस्बों और गांवों के लोगों को एजेंट यह विश्वास दिलाते थे कि सहारा की स्कीमें सरकारी मान्यता प्राप्त हैं। इसी भरोसे के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय निवेशकों की गाढ़ी कमाई कंपनी के पास जमा होती चली गई। समय के साथ यह आंकड़ा करोड़ों निवेशकों तक पहुंच गया और यह मामला भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल हो गया।

आगे की राह

ईडी की इस चार्जशीट ने सहारा मामले की परतों को फिर से खोल दिया है। अब देखना होगा कि कोर्ट में यह लड़ाई किस दिशा में जाती है और क्या करोड़ों निवेशकों को कभी उनका पैसा लौट सकेगा। फिलहाल, यह मामला भारतीय वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और आम जनता की बचत सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।


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