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केजीएमयू में महिला डॉक्टर से धोखाधड़ी और धर्मांतरण दबाव का आरोप, आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर निलंबित
लखनऊ, 23 दिसंबर 2025
लखनऊ स्थित में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक पर अपनी सहकर्मी हिंदू महिला डॉक्टर को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण का दबाव बनाने, शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने और मानसिक प्रताड़ना देने का गंभीर आरोप लगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोप है कि सच्चाई छिपाकर लंबे समय तक दबाव बनाए जाने से मानसिक रूप से टूट चुकी महिला डॉक्टर ने 17 दिसंबर को हॉस्टल में जहरीली गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।
मामला सामने आने के बाद पीड़िता की शिकायत पर ने मुख्यमंत्री योगी ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
मामले में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जागा केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया और उसके कैंपस में प्रवेश पर रोक लगा दी ।
पीड़ित महिला डॉक्टर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई। उसका आरोप है कि रमीजुद्दीन नायक अकेला नहीं है, बल्कि केजीएमयू परिसर में एक संगठित गैंग सक्रिय है, जो सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण कराने में लगा हुआ है। इस आरोप को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और स्पष्ट किया है कि पूरे प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस को एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। परिजनों के अनुसार, आरोपी ने यह तथ्य छिपाए रखा कि वह इसी वर्ष फरवरी में एक अन्य हिंदू युवती का धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह कर चुका है। जब इस सच्चाई की जानकारी पीड़िता को हुई, तो आरोपी ने पहली पत्नी को छोड़ने का वादा किया, लेकिन इसके बदले पीड़िता पर भी धर्म परिवर्तन की शर्त रखी। इनकार करने पर कथित तौर पर उसने पीड़िता से दूरी बना ली और मानसिक उत्पीड़न बढ़ा दिया, जिससे परेशान होकर महिला डॉक्टर ने आत्महत्या का प्रयास किया।
जहरीली दवाइयां खाने के बाद पीड़िता की हालत गंभीर हो गई थी, जिसके बाद उसे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर और फिर सीसीएम आईसीयू में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद 19 दिसंबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई। इसके बाद पीड़िता और उसके परिजनों ने राज्य महिला आयोग और जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगाई।
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने पुष्टि की है कि आरोपी और पीड़िता दोनों ही पैथोलॉजी विभाग में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है, ताकि कैंपस के भीतर किसी भी संदिग्ध गतिविधि या नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए साफ कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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