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आंध्र प्रदेश में गैर-मुस्लिम बच्चों के खतना का आरोप, CBI के पूर्व निदेशक के पत्र से मचा हड़कंप
👉photo.. Sanketik
23 दिसंबर 2025
आंध्र प्रदेश में गैर-मुस्लिम बच्चों के कथित तौर पर खतना किए जाने के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस मामले को लेकर CBI के पूर्व निदेशक ने राज्य के स्वास्थ्य, परिवार कल्याण मंत्री को एक पत्र लिखकर गंभीर चिंता जताई है।
अपने पत्र में नागेश्वर राव ने दावा किया है कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि आंध्र प्रदेश में कुछ डॉक्टरों को यह विश्वास दिलाया जा रहा है कि खतना एक चिकित्सकीय रूप से लाभकारी प्रक्रिया है। इसी सोच के आधार पर बीते काफी समय से गैर-मुस्लिम बच्चों पर भी यह प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने इसे केवल चिकित्सा से जुड़ा मामला न मानते हुए एक गहरे और संगठित पैटर्न की ओर इशारा किया है।
पूर्व CBI प्रमुख के अनुसार, यह स्थिति मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के दौरान गलत या भ्रामक जानकारी फैलाए जाने की ओर संकेत करती है। उनका कहना है कि इसे वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत करते हुए किसी विशेष धार्मिक या सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। नागेश्वर राव ने मांग की है कि पिछले दस वर्षों या उससे अधिक समय के मेडिकल रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन मामलों में किस चिकित्सकीय कारण से खतना की प्रक्रिया अपनाई गई।
उन्होंने यह भी कहा कि हर मामले में खतना के पीछे स्पष्ट मेडिकल संकेत और वैध कारणों का होना जरूरी है, अन्यथा यह चिकित्सा नैतिकता और कानूनी प्रावधानों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्होंने नागेश्वर राव की चिंताओं के बारे में संज्ञान लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सबूत-आधारित चिकित्सा पद्धतियों, नैतिक मानकों और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य विभाग स्थापित मेडिकल दिशानिर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार इस मुद्दे की जांच करेगा।
फिलहाल, इस संवेदनशील आरोप के सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, मेडिकल शिक्षा प्रणाली और सरकारी निगरानी पर व्यापक बहस शुरू हो गई है।
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