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यूजीसी के नए नियमों पर सियासी घमासान, मायावती ने दलितों को किसी नेता के भड़कानें में आने की कई बात
लखनऊ, 28 जनवरी 2026 —
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव खत्म करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सामान्य वर्ग के छात्रों और संगठनों द्वारा इन नियमों का विरोध किया जा रहा है, वहीं बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती इस मुद्दे पर खुलकर सामने आई हैं और उन्होंने नियमों का समर्थन करते हुए विरोध करने वालों पर तीखा हमला बोला है।
यूजीसी के नए प्रावधानों के तहत सभी सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में ‘इक्विटी कमेटी’ यानी समता समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। यह समिति शैक्षणिक परिसरों में भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी और समावेशी माहौल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाएगी। समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य की गई है।
इस मुद्दे पर मायावती ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट जारी कर तीन बिंदुओं में अपनी प्रतिक्रिया दी। 1👉उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के समाधान के लिए बनाई जा रही इक्विटी कमेटी का विरोध करना अनुचित है और इसका विरोध वही लोग कर रहे हैं जिनकी सोच जातिवादी है और जो इसे अपने खिलाफ साजिश के रूप में देख रहे हैं।
2👉 उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इन नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेती तो स्थिति बेहतर हो सकती थी। मायावती ने चेताया कि बिना संवाद के ऐसे फैसले सामाजिक तनाव को जन्म दे सकते हैं, जिस पर सरकार और संस्थानों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
3👉अपने बयान में उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों को भी सतर्क रहने की अपील की और कहा कि वे अपने ही समाज के स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों से सावधान रहें। उनका कहना था कि कुछ नेता अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए इन वर्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दूसरी ओर, इन नियमों का विरोध कर रहे छात्र संगठनों और सामान्य वर्ग के समूहों का तर्क है कि इक्विटी कमेटी व्यवस्था का दुरुपयोग हो सकता है और इससे संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होने के साथ-साथ आपसी तनाव भी बढ़ सकता है।
विवाद बढ़ने के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सफाई देते हुए कहा है कि नए ढांचे के तहत किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उद्देश्य केवल समानता सुनिश्चित करना है और दुरुपयोग की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।
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