Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत ने बदली रणनीति, LPG सप्लाई मजबूत करने के लिए उठाए बड़े कदम
नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार अब पारंपरिक आपूर्ति स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर विविध देशों से स्पॉट खरीद के जरिए गैस मंगा रही है, ताकि किसी भी स्थिति में देश में एलपीजी की कमी न हो।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल के हफ्तों में सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका सहित कई देशों से एलपीजी के अतिरिक्त कार्गो बुक किए हैं। ये शिपमेंट जून और जुलाई तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। इस कदम का मकसद बाजार में स्थिरता बनाए रखना और घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, पहले भारत अपनी करीब 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात के जरिए पूरा करता था, लेकिन अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि देश में गैस की सप्लाई किसी भी हाल में बाधित न हो, इसके लिए जहां से भी संभव होगा, वहां से गैस खरीदी जाएगी।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में प्रतिदिन करीब 80,000 टन एलपीजी की मांग है। हाल के समय में घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर लगभग 46,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जो पहले की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद शेष जरूरत को पूरा करने के लिए आयात के विकल्पों का विस्तार किया गया है।
पहले भारत की लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति खाड़ी देशों—यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और ओमान से होती थी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी बड़े स्तर पर गैस की खरीद शुरू कर दी गई है। इससे सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित और संतुलित हो गई है।
सरकार के अनुसार करीब आठ लाख टन एलपीजी की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है और यह भारत के लिए रवाना हो चुकी है। पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचे 10 जहाजों में से 9 में एलपीजी होने का तथ्य इस बात को दर्शाता है कि सरकार इस सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्पॉट खरीद की नीति अल्पकालिक संकट के समय बेहद प्रभावी साबित होती है। इससे तत्काल जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध हो जाती है और कीमतों पर भी कुछ हद तक नियंत्रण बना रहता है। साथ ही, अलग-अलग देशों से खरीद करने से किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम होती है, जो भविष्य में भी फायदेमंद रहेगा।
सरकार के इन कदमों के बाद उपभोक्ताओं के लिए राहत की स्थिति बनती दिख रही है। आने वाले महीनों में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की संभावना बेहद कम हो गई है और सरकार ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में देश में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।
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👉 समाचार स्त्रोत- टाइम्स ऑफ़ इंडिया
