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69000 शिक्षक भर्ती विवाद फिर गरमाया, लखनऊ में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन; सरकार पर पैरवी न करने का आरोप
लखनऊ, 18 मई 2026.
उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन किया और शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव करने पहुंच गए। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी न करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी सड़क पर रेंगते हुए और दंडवत करते हुए शिक्षा मंत्री के आवास तक पहुंचे। उनका कहना था कि सरकार की ओर से कोर्ट में मजबूती से पक्ष नहीं रखा जा रहा है, जिसके कारण मामला लंबे समय से अधर में लटका हुआ है और हजारों युवाओं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में सक्षम वकील खड़ा कर जल्द सुनवाई सुनिश्चित कराए और भर्ती प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय करवाए।
इससे पहले भी 22 अप्रैल 2026 को अभ्यर्थियों ने लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन किया था। उस दौरान सैकड़ों अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए पहुंचे थे और गले में झाड़ू तथा मटकी लटकाकर विरोध जताया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि सरकार दलित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय कर रही है।
दरअसल, 69000 शिक्षक भर्ती मामला आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवादों में फंसा हुआ है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि ओबीसी और एससी वर्ग को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। जानकारी के अनुसार ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत के बजाय कम प्रतिनिधित्व मिला, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग को भी निर्धारित आरक्षण से कम अवसर मिलने का दावा किया गया है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि लगभग 19 हजार सीटों पर आरक्षण नियमों की अनदेखी करते हुए चयन कर लिया गया, जबकि आरक्षित वर्ग के कई पात्र उम्मीदवार चयन सूची से बाहर रह गए। इसी मुद्दे को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अगस्त 2024 में भर्ती की चयन सूची को निरस्त करते हुए सरकार को तीन महीने के भीतर नई सूची जारी करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, इस फैसले के बाद सामान्य वर्ग के चयनित अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए, जहां मामला अभी भी लंबित है। लगातार सुनवाई टलने और समाधान न निकलने से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और मंत्रियों, विधायकों तथा सांसदों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में योगी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, क्योंकि हजारों युवाओं और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
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