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चार दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, विपक्ष ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली, 19 मई 2026.
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी होने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। चार दिनों के भीतर दूसरी बार ईंधन महंगा होने से आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जनता से “वसूली” करने का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल के संकट को इसकी वजह बताया है।
📍कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को निशाने पर लेते हुए लिखा कि “महंगाई मैन मोदी” ने एक बार फिर जनता पर बोझ बढ़ा दिया है। पार्टी का दावा है कि पिछले चार दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 4 रुपए तक बढ़ चुके हैं, जिससे कई शहरों में पेट्रोल 109 रुपए और डीजल 96 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने आम जनता पर महंगाई का नया बोझ डालना शुरू कर दिया है।
📍कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों का बोझ आम जनता पर डाल रही है। खड़गे ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे और अमेरिका से मिली छूट का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सरकार को तेल खरीदने की अनुमति मिल गई है तो फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार क्यों बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल प्रचार में व्यस्त है जबकि जनता महंगाई से परेशान है।
📍कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और चुनावी रैलियों का खर्च आखिरकार गरीब जनता की जेब से ही निकाला जा रहा है। उनका आरोप था कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है।
📍समाजवादी पार्टी ने भी ईंधन मूल्य वृद्धि को लेकर सरकार को घेरा। पार्टी नेता राजीव राय ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी नेता पहले दिखावे के लिए ऑटो-रिक्शा में सफर कर रहे थे, अब वे बताएं कि क्या आज भी उसी तरह यात्रा कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों से ऑटो चालकों, किसानों और आम यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
📍विपक्ष के हमलों के बीच बीजेपी नेताओं ने सरकार का बचाव किया। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि दुनिया भर में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता को इस वैश्विक संकट के सीधे असर से बचाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसके कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया।
📍बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी विवाद पर अलग प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान संकट के बाद झारखंड में शराब की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, लेकिन उस पर कोई आंदोलन नहीं हो रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि पेट्रोल-डीजल में कुछ रुपए की बढ़ोतरी पर इतना बड़ा विरोध क्यों किया जा रहा है।
📍इस बीच पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का समर्थन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों को भारी सब्सिडी देकर राहत दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हजारों रुपए की लागत वाला यूरिया किसानों को बेहद कम कीमत पर उपलब्ध करा रही है और किसानों को उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए।
देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष जहां इसे जनता की “लूट” बता रहा है, वहीं सरकार वैश्विक संकट और तेल बाजार की मजबूरियों का हवाला देकर फैसले का बचाव कर रही है।
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