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💥6 जून 1981: जब बागमती नदी में समा गई थी पूरी ट्रेन, भारत का सबसे भयावह रेल हादसा
6 जून 1981। भारतीय रेल के इतिहास में 6 जून 1981 का दिन एक ऐसी त्रासदी के रूप में दर्ज है, जिसे आज भी देश की सबसे बड़ी और दर्दनाक रेल दुर्घटनाओं में गिना जाता है। बिहार में बागमती नदी पर बने पुल से एक यात्री ट्रेन के कई डिब्बे नदी में गिर गए थे, जिससे सैकड़ों लोगों की जान चली गई। यह हादसा आज भी भारत की सबसे भीषण रेल दुर्घटना माना जाता है।
यह दुर्घटना बिहार के बिहार के खगड़िया क्षेत्र में मानसी और सहरसा रेलखंड के बीच बदला घाट और धमारा घाट स्टेशन के पास हुई थी। उस समय भारी बारिश, तेज आंधी और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई थी। यात्रियों से खचाखच भरी पैसेंजर ट्रेन बागमती नदी पर बने पुल संख्या-51 से गुजर रही थी, तभी अचानक उसके 9 में से 7 डिब्बे पटरी से उतरकर उफनती नदी में जा गिरे।
दुर्घटना के बाद कुछ ही मिनटों में डिब्बे पानी में डूबने लगे। नदी का जलस्तर सामान्य से काफी ऊपर था और तेज बहाव के कारण यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग डिब्बों में ही फंस गए और देखते ही देखते पूरा घटनास्थल चीख-पुकार से गूंज उठा।
📍हादसे की वजह आज भी रहस्य
इस दुर्घटना के वास्तविक कारण को लेकर आज तक पूरी तरह सहमति नहीं बन सकी है। हादसे को लेकर दो प्रमुख सिद्धांत सामने आए थे।
पहली थ्योरी के अनुसार, पुल के पास रेलवे ट्रैक पर किसी मवेशी के आ जाने के कारण लोको पायलट ने अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। बारिश से भीगी पटरियों पर तेज रफ्तार ट्रेन का संतुलन बिगड़ गया और कई डिब्बे पटरी से उतरकर सीधे नदी में गिर गए।
दूसरी थ्योरी के मुताबिक, उस समय क्षेत्र में बेहद तेज आंधी और तूफान चल रहा था। यात्रियों ने बचाव के लिए खिड़कियां और दरवाजे बंद कर लिए थे, जिससे हवा का दबाव बढ़ गया। माना गया कि तेज तूफानी हवाओं ने ट्रेन के डिब्बों को असंतुलित कर दिया और वे पुल से नीचे नदी में जा गिरे।
📍बचाव कार्य में आई भारी मुश्किलें
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन खराब मौसम और बाढ़ के कारण बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लग गया। नदी का तेज बहाव और गंदला पानी अभियान में सबसे बड़ी बाधा साबित हुआ।
सेना के गोताखोरों और स्थानीय प्रशासन ने कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। नदी से सैकड़ों शव निकाले गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग हमेशा के लिए लापता हो गए। आधिकारिक आंकड़ों में मृतकों की संख्या 235 से 300 के बीच बताई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस हादसे में लगभग 800 लोगों की जान गई थी।
📍दुनिया के सबसे बड़े रेल हादसों में शामिल
बागमती रेल दुर्घटना को केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े रेल हादसों में भी गिना जाता है। इस त्रासदी ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था, पुलों की निगरानी और आपदा प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे।
घटना के 45 वर्ष बाद भी बागमती नदी के किनारे रहने वाले लोग उस भयावह दिन को याद कर सिहर उठते हैं। सैकड़ों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया था और कई लोगों को आज तक अपने परिजनों का अंतिम पता नहीं चल सका। यह हादसा भारतीय रेल इतिहास का ऐसा काला अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
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