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24 साल पुराने मुकदमे का दर्द या न्याय की लंबी प्रतीक्षा? रिटायर शिक्षक ने जहर खाकर दी जान, सुसाइड नोट में पूर्व डीजी समेत 7 लोगों पर लगाए गंभीर आरोप
ललितपुर, 11 जुलाई 2026।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में 78 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम गोस्वामी की संदिग्ध परिस्थितियों में जहर खाने से मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। मौत से पहले लिखे गए कथित सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी आत्महत्या के लिए तत्कालीन ललितपुर पुलिस अधीक्षक रहे और हाल ही में डीजी पद से सेवानिवृत्त हुए एलवी एंटोनी देवकुमार सहित सात लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले के सामने आने के बाद दो दशक से अधिक पुराने एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2002 में राजाराम गोस्वामी के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी सुनवाई अभी भी न्यायालय में चल रही थी। मामले में 16 जुलाई को अगली तारीख निर्धारित थी। परिजनों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे को लेकर वह मानसिक तनाव में रहते थे।
मृतक द्वारा न्यायाधीश को संबोधित कथित सुसाइड नोट में बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोट में लिखा गया है कि तत्कालीन एसपी ने उन्हें स्कूल से बुलवाया, जाति पूछी और कथित तौर पर गंदा पानी पीने के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर उनके कपड़े उतरवाकर सार्वजनिक रूप से लाठियों से पिटवाने और बाद में जेल भेजने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने यह भी लिखा कि उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया और पिछले 24 वर्षों से वह इस अपमान और मानसिक पीड़ा को झेलते रहे।
सुसाइड नोट में यह भी उल्लेख है कि हजारों ग्रामीणों ने उस समय विरोध प्रदर्शन किया था और प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। राजाराम गोस्वामी ने लिखा कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं और अब जीवन जीने की इच्छा समाप्त हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, ललितपुर के बार थाना क्षेत्र के चिकलौआ गांव निवासी राजाराम गोस्वामी ने कथित तौर पर कोल्ड ड्रिंक में जहर मिलाकर पी लिया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद मिला कथित सुसाइड नोट अब जांच का महत्वपूर्ण आधार बन गया है।
हालांकि, सुसाइड नोट में लगाए गए सभी आरोप एकतरफा आरोप हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी एलवी एंटोनी देवकुमार या अन्य नामजद व्यक्तियों की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कथित सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी स्तर पर अन्याय हुआ है तो क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा। पूरे मामले पर सभी की नजर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
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