स्तन दबाना यौन अपराध नहीं:हाई कोर्ट के आदेश पर पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट…….

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यौन अपराध मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी अदालतों और पुलिस को हैंडबुक के पालन का निर्देश

नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026।

सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई में न्यायिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी समिति की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट तथा देश के सभी हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि सभी न्यायालय इस विषय पर तैयार की गई हैंडबुक में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें।

यह रिपोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च 2025 के उस विवादित आदेश के बाद स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही के दौरान तैयार की गई थी। उस आदेश में कहा गया था कि किसी लड़की के पजामे का नाड़ा खींचना और उसके स्तनों को पकड़ना रेप के प्रयास की श्रेणी में नहीं आएगा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए न्यायिक अधिकारियों को संवेदनशील बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया था।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस प्रकार की टिप्पणियां समय-समय पर विभिन्न अदालतों के आदेशों में सामने आती रही हैं। उन्होंने 9 जुलाई को पटना हाई कोर्ट के एक आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि 📍किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना भी रेप के प्रयास की श्रेणी में नहीं माना गया।”

इस पर जस्टिस वी. मोहना ने पूछा कि क्या पटना हाई कोर्ट के समक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश और न्यायिक संवेदनशीलता संबंधी निर्देशों का उल्लेख किया गया था। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायाधीशों की भी जिम्मेदारी है कि वे प्रासंगिक कानून और पूर्व निर्णयों का अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि न्यायिक शोध और आवश्यक संदर्भों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि सभी न्यायालय यौन अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक हैंडबुक में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। साथ ही राज्यों को निर्देश दिया गया कि सभी पुलिस थानों को भी आवश्यक आदेश जारी किए जाएं, ताकि एफआईआर दर्ज करने और आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया में भी इसी हैंडबुक का पालन सुनिश्चित किया जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि इस संबंध में अपना तर्कपूर्ण निर्णय भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा।

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