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सरयू का दर्दनाक कहर: धान की रोपाई के बाद हाथ-पैर धोने गया 12 वर्षीय अनाथ सुनील मगरमच्छ का बना शिकार, परिवार का आखिरी सहारा भी छिन गया
बहराइच, 18 जुलाई 2026।
बहराइच जिले के महसी क्षेत्र से आई एक दर्दनाक घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। ग्राम पंचायत तिकुरी में धान की रोपाई के बाद 12 वर्षीय मासूम सुनील सिंह अपने हाथ-पैर धोने के लिए सरयू (घाघरा) नदी के किनारे गया था। उसे क्या पता था कि नदी में घात लगाए बैठा मगरमच्छ उसकी जिंदगी छीन लेगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही सुनील नदी के किनारे पहुंचा, मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर उसे जबड़ों में दबोच लिया और गहरे पानी की ओर खींच ले गया। मौके पर मौजूद उसके चाचा विजयराज सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाकर भतीजे को बचाने का प्रयास किया। उन्होंने मगरमच्छ से संघर्ष भी किया, लेकिन वह सुनील को कई बार पानी में पटकते हुए गहराई में ले गया। कुछ ही पलों में मासूम आंखों से ओझल हो गया और किनारे खड़े लोगों की चीख-पुकार पूरे इलाके में गूंज उठी।
इस घटना की सबसे मार्मिक बात यह है कि सुनील पहले ही अपने माता-पिता को खो चुका था। करीब सात वर्ष पहले उसकी मां और पांच वर्ष पहले उसके पिता का निधन हो गया था। अब परिवार के तीन छोटे भाई-बहनों के सिर से उनके बड़े भाई का साया भी उठ गया। जिस बच्चे ने कम उम्र में मां-बाप का दुख सहा, वह खुद भी जिंदगी की जंग हार गया और परिवार का आखिरी सहारा भी छिन गया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया। ग्रामीणों की मदद से मासूम की तलाश शुरू की गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका कोई पता नहीं चल सका। इस दौरान वन विभाग की टीम ने हमलावर मगरमच्छ को पकड़ लिया।
घटना के बाद पूरे तिकुरी गांव में मातम पसरा हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल है—आखिर इस मासूम की क्या गलती थी? ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, उचित मुआवजा तथा सरयू नदी के मगरमच्छ प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा असहनीय दर्द न झेलना पड़े।
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