बिजली विभाग की लापरवाही: करोड़ों का भुगतान होने के बावजूद अंधेरे और उमस में पढ़ने को मजबूर परिषदीय प्राथमिक विद्यालय के बच्चे…….

Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

दो साल बाद भी नहीं जले स्कूलों में बिजली के बल्ब! करोड़ों का भुगतान होने के बावजूद अंधेरे और उमस में पढ़ने को मजबूर मासूम

बस्ती, 18 जुलाई 2026।
जनपद बस्ती के परिषदीय विद्यालयों में विद्युतीकरण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार मार्च 2024 में ही विद्युत विभाग द्वारा दिए गए एस्टीमेट के अनुरूप करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई विद्यालयों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा नहीं हो सका। इसका खामियाजा छोटे-छोटे मासूम बच्चों को भीषण गर्मी और उमस के बीच उठाना पड़ रहा है।

दस्तावेजों के अनुसार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बस्ती ने 27 मार्च 2024 को विद्युत वितरण निगम के विभिन्न खंडों के खातों में विद्यालयों के विद्युतीकरण के लिए लगभग ₹1.67 करोड़ की धनराशि हस्तांतरित की थी। इसके बाद संबंधित विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और वायरिंग का कार्य पूरा कराया जाना था।

इसी क्रम में विकास खंड कप्तानगंज के उच्च प्राथमिक विद्यालय बटटूपुर का मामला सामने आया है, जहां विद्युत विभाग द्वारा लगभग ₹1,98,776 का एस्टीमेट दिए जाने के बाद पूरी धनराशि जमा कर दी गई। शिकायत के अनुसार संबंधित कार्यदायी संस्था को आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन आज तक विद्यालय में विद्युतीकरण नहीं हो सका।

मामले को लेकर 24 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में कहा गया कि भीषण गर्मी के कारण बच्चे परेशान हो रहे हैं और बिजली न होने से विद्यालय में पंखे तक नहीं चल पा रहे हैं। शिकायत में यह भी आशंका जताई गई कि यदि समय रहते विद्युतीकरण नहीं कराया गया तो किसी दिन कोई अप्रिय घटना भी हो सकती है।

जनसुनवाई में विद्युत विभाग की ओर से यह स्वीकार किया गया कि शिकायत सही है तथा संबंधित अवर अभियंता को कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं एक अन्य पत्र में कार्यदायी संस्था को भी तत्काल कार्य प्रारंभ कर प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का कहना है कि धरातल पर अब तक कार्य पूरा नहीं हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मार्च 2024 में ही सरकारी धनराशि जारी कर दी गई थी, तो आखिर दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विद्यालयों में बिजली क्यों नहीं पहुंची? जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी या कार्यदायी संस्था की लापरवाही का खामियाजा आखिर मासूम बच्चों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?

भीषण गर्मी और उमस के इस दौर में बिना बिजली के विद्यालयों में पढ़ाई करना बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए कठिन होता जा रहा है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी तय की जाए तथा जिन विद्यालयों में अभी तक विद्युतीकरण अधूरा है, वहां तत्काल कार्य पूरा कराकर बच्चों को राहत दिलाई जाए।

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