Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

आखिर क्यों बढ़ रही हैं गर्म रातें? दिन से ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है रात का तापमान
नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026। जलवायु परिवर्तन पर चर्चा अक्सर दिन के बढ़ते तापमान और हीटवेव तक सीमित रहती है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार अब एक नया और अधिक गंभीर संकट तेजी से उभर रहा है—गर्म रातें (Hot Nights)। भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में रात का तापमान पहले की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। इससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं और कृषि से लेकर बिजली की मांग तक पर असर पड़ रहा है।
रातें क्यों हो रही हैं ज्यादा गर्म?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। सामान्य परिस्थितियों में सूर्यास्त के बाद पृथ्वी दिनभर की गर्मी अंतरिक्ष में छोड़ देती है, लेकिन वातावरण में बढ़ रही ग्रीनहाउस गैसें एक “कंबल” की तरह काम करती हैं और इस गर्मी को बाहर निकलने से रोक देती हैं। परिणामस्वरूप रात का तापमान पहले जितना नहीं गिर पाता।
दूसरा बड़ा कारण शहरी ऊष्मा द्वीप (Urban Heat Island Effect) है। शहरों की कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और सीमेंट दिनभर सूर्य की गर्मी सोखती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती रहती हैं। यही वजह है कि बड़े शहरों में रातें गांवों की तुलना में अधिक गर्म महसूस होती हैं।
तीसरा कारण बढ़ती नमी (Humidity) है। हवा में अधिक नमी होने पर पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर की प्राकृतिक ठंडक की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में तापमान भले थोड़ा कम हो, लेकिन महसूस होने वाली गर्मी कहीं अधिक होती है।
गर्म रातें क्यों हैं ज्यादा खतरनाक?
The Gardian के अनुसार दिन की तेज धूप के बाद यदि रात में तापमान कम हो जाए तो शरीर को आराम और पुनः सामान्य होने का समय मिल जाता है। लेकिन जब रात भी गर्म रहती है तो शरीर लगातार गर्मी झेलता रहता है।
इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, हृदय और फेफड़ों के मरीजों तथा बाहर काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ता है। लगातार गर्म रातों से नींद प्रभावित होती है, शरीर में पानी की कमी बढ़ती है और हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
खेती और अर्थव्यवस्था पर भी असर
गर्म रातें केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि कृषि को भी प्रभावित करती हैं। कई फसलों को रात में अपेक्षाकृत कम तापमान की आवश्यकता होती है। यदि रातें लगातार गर्म रहें तो फसलों की वृद्धि, उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही सिंचाई, बिजली और शीतलन (कूलिंग) की मांग भी बढ़ जाती है।
भारत में क्यों बढ़ रही चिंता?
भारत तेजी से शहरीकरण, घटते हरित क्षेत्र, कम होते जलाशयों और बढ़ते तापमान की दोहरी चुनौती झेल रहा है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि भारतीय शहर अब “हीट ट्रैप” बनते जा रहे हैं, जहां दिन की गर्मी रातभर बनी रहती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और अनियोजित शहरीकरण पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में गर्म रातों की संख्या और बढ़ सकती है।
समाधान क्या हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एयर कंडीशनर इसका स्थायी समाधान नहीं हैं। शहरों में अधिक पेड़ लगाना, जलाशयों का संरक्षण, हरित क्षेत्रों का विस्तार, गर्मी कम सोखने वाली निर्माण सामग्री का उपयोग और दीर्घकालिक जलवायु नीतियां अपनाना जरूरी है। साथ ही हीट एक्शन प्लान में केवल दिन की गर्मी ही नहीं, बल्कि गर्म रातों को भी शामिल करना समय की आवश्यकता बन चुका है।
अंत में…….
जलवायु परिवर्तन का सबसे खामोश लेकिन खतरनाक संकेत अब केवल तपते दिन नहीं, बल्कि गर्म होती रातें हैं। यदि रात में भी तापमान सामान्य स्तर तक नहीं गिरता, तो मानव स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा व्यवस्था और शहरी जीवन पर इसका असर लगातार बढ़ेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में “गर्म रातें” जलवायु संकट का एक प्रमुख संकेतक बन सकती हैं और इससे निपटने के लिए अभी से ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
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