प्रधानमंत्री क्यों जाना चाहते हैं विवेकानंद शिला और क्यों इससे नाखुश है विपक्ष

जी पी दुबे
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NGV PRAKASH NEWS

पीएम की साधना पर विपक्ष को आपत्ति क्यों

चुनावी प्रचार से मुक्त होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘ध्यान’ में लीन हो जाएंगे |लोकसभा चुनाव 2024 के आखिरी चरण का प्रचार 30 मई की शाम को खत्म हो रहा है और प्रधानमंत्री उसके बाद दो दिनों के लिए तमिलनाडु चले जाएंगे, वह कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक शिला पर दो दिन ‘साधना’ करेंगे |
यहां बताते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2019 आम चुनाव में प्रचार के बाद केदारनाथ धाम पहुंच कर वहां 15 घंटे तक ‘एकांतवास’ किया था |
और इस बार प्रधानमंत्री 48 घंटों तक ‘मौन व्रत’ पर रहेंगे |
वहीं विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री के इस ज्ञान कार्यक्रम से काफी नाखुश नजर आ रही हैं तथा वह मीडिया को प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से दूर रखना चाहती हैं |
विवेकानंद स्मारक शिला एक छोटा सा टापू है | यह कन्याकुमारी के वावथुरई समुद्र तट से लगभग 500 मीटर दूर स्थित है | 1892 में, स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी के तट से तैरते हुए इस टापू पर पहुंचे थे| तमिलनाडु टूरिज्म की वेबसाइट के अनुसार, स्वामी विवेकानंद को यहीं पर ज्ञान की प्राप्ति हुई थी | जिस चट्टान पर स्मारक बना है, वहीं पर बैठ विवेकानंद ध्यानमग्न हुए थे |
कन्याकुमारी आने से पहले विवेकानंद ने चार साल तक भारत का कोना-कोना घूम कर देखा था. आखिरकार, कन्याकुमारी में उन्होंने अपना दर्शन तैयार किया |1963 में स्वामी विवेकानंद की जन्मशती के मौके पर विवेकानंद स्मारक समिति का गठन किया गया था |उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एकनाथ रानाडे की महत्वपूर्ण भूमिका थी |
टापू पर बने स्मारक का उद्घाटन 1970 में तत्कालीन राष्ट्रपति वी वी गिरि ने किया था |
प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श बताया है. पिछले साल मोदी ने रामकृष्‍ण मिशन की 125वीं वर्षगांठ पर आयोजन में हिस्सा लिया था | रामकृष्‍ण मिशन एक परोपकारी संगठन है जिसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने की थी |
बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार का अंत तमिलनाडु से करके पीएम मोदी शायद राजनीतिक संदेश भी देना चाह रहे हैं |
मोदी और उनकी पार्टी ने हाल के दिनों में दक्षिण में पैठ मजबूत करने की खूब कोशिश की है | इस साल वह सात बार तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं |
चुनाव प्रचार के दौरान, मोदी ने कहा कि उन्हें यकीन है कि बीजेपी दक्षिण भारत में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी.
पांच दक्षिणी राज्यों- तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में कुल 131 लोकसभा सीटें हैं |
39 लोकसभा सीटों के साथ तमिलनाडु चुनावी रूप से दक्षिण का सबसे अहम राज्य है |

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ज्ञान प्रकाश दुबे

एडिटर इन चीफ

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